उद्धव गुट के सांसद नागेश पाटिल अष्टीकर ने शिवसेना (शिंदे) का थामा दामन, बोले- विकास कार्यों के लिए फंड की थी कमी
नागेश पाटिल अष्टीकर ने उद्धव गुट छोड़ एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के फैसले का बचाव किया।
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उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के साथ आए नागेश पाटिल अष्टीकर
HighLights
नागेश पाटिल अष्टीकर ने शिंदे गुट में शामिल होने का बचाव किया।
संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए धन की कमी बताई।
जनता की अपेक्षाएं पूरी करने के लिए यह कदम उठाया।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह बागी लोकसभा सांसदों में शामिल नागेश पाटिल अष्टीकर ने रविवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अपने संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन नहीं मिलने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
हिंगोली से सांसद अष्टीकर ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि सत्ता पक्ष में नहीं होने की वजह से उनके क्षेत्र के लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के काम नहीं हो पा रहे थे।
'जनता के काम नहीं हो पा रहे थे'
नागेश पाटिल अष्टीकर ने कहा, 'लोगों ने हमें बड़ी उम्मीदों के साथ चुना है। उनके काम करवाना मेरी जिम्मेदारी है, लेकिन विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल रहा था। सांसद निधि (MPLADS) के तहत मिलने वाले 5 करोड़ रुपये सीमित हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने यह फैसला लिया है।'
अष्टीकर ने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण अपने क्षेत्र के लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है और इसी वजह से उन्होंने सत्तारूढ़ शिवसेना का साथ देने का निर्णय लिया।
सांसद ने भरोसा दिलाया कि वह आगे भी अपने क्षेत्र की जनता के लिए काम करते रहेंगे और मतदाताओं द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों को पूरा करेंगे।
संजय राउत की टिप्पणियों का भी किया जिक्र
अष्टीकर ने अपने फैसले के पीछे एक और कारण बताते हुए कहा कि हाल के दिनों में उनके और अन्य सांसदों के खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों ने भी उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
सांसद ने कहा, '18 जून तक मैंने और कुछ अन्य सांसदों ने कोई फैसला नहीं किया था। हम कहीं नहीं गए थे। लेकिन गुरुवार से हमारे खिलाफ कुछ ऐसी टिप्पणियां की गईं, जिनसे हमें लगा कि अब यहां (शिवसेना-यूबीटी) बने रहने का कोई मतलब नहीं है।'
उनका इशारा शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत की ओर माना जा रहा है, जिन्होंने हाल के दिनों में बागी सांसदों की तीखी आलोचना की थी।
अष्टीकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में कथित 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के शिंदे गुट में जाने से पार्टी को बड़ा झटका लगा है और इससे राज्य की राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।
