मुंबई, राज्य ब्यूरो। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है कि दुनिया से आतंकवाद और भ्रष्टाचार का खात्मा करने के लिए सभी देशों को साथ आने और एक-दूसरे से सहयोग करने की जरूरत है। वह आज मुंबई में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित पार्टनरशिप समिट 2019 के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। 

उपराष्ट्रपति नायडू ने अच्छे व्यापारिक माहौल के लिए शांति की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि शांति तभी स्थापित हो सकती है, जब दुनिया से आतंकवाद खत्म हो। हम सबको मिलकर आतंकवाद के विरुद्ध लड़ना होगा। आतंकवाद का कोई जाति या धर्म नहीं होता। इसलिए हम सबको साथ आकर आतंकवाद को खत्म करने की दिशा में काम करना चाहिए। नायडू ने आगे कहा कि इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र से लेकर और भी कई मंचों पर बात की जाती रही है। अब हमें बातचीत बंद कर इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। हमें उन लोगों पर भी कार्रवाई करनी चाहिए, जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं या उसे आर्थिक मदद मुहैया कराते हैं। बता दें कि इस पार्टनरशिप समिट 2019 में करीब 40 देशों के प्रतिनिधि एवं कई देशों के मंत्री भी आए हुए हैं। 

आतंकवाद की भांति ही भ्रष्टाचार पर भी प्रहार करते हुए वेंकैया नायडू ने कहा कि हमें भ्रष्टाचार पर भी रोक लगाने चाहिए। हमें काले धन पर रोक लगाने के लिए भी साथ आना होगा। ये काम भी अकेले संभव नहीं है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए नीरव मोदी, मेहुल चोकसी एवं विजय माल्या जैसे आर्थिक अपराधियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज लोग एक देश में भ्रष्टाचार कर दूसरे देश में जाकर छुप जाते हैं। ऐसे लोगों को वापस भेजने के लिए और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए हमें आपस में समझौते करने चाहिए। ताकि उन्हें जल्दी से जल्दी सजा दिलाई जा सके। 

इसी समिट के उद्घाटन सत्र में बीच वक्तव्य देते हुए केंद्रीय उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने विभिन्न देशों और भारत के बीच कृषि सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व के देशों को भारत से भारी मात्रा में फल और सब्जियां जाते हैं। यदि आयात करनेवाले देशों की देखरेख में ही मूल्यवर्द्धित कृषि उत्पाद तैयार किए जाएं तो इससे निर्यातक और आयातक, दोनों देशों को फायदा होगा। प्रभु ने इस सम्मेलन में भाग लेने आए नेपाल के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में अन्य देशों के साथ यदि भारत का सहयोग बढ़ता है, तो उसका सीधा लाभ नेपाल जैसे भारत के पड़ोसी देशों को भी मिलेगा। क्योंकि नेपाल के लोग बड़ी संख्या में भारत में आते हैं, और भारत के लोग नेपाल जाते हैं।                       

 

Posted By: Babita