राज्य ब्यूरो, मुंबई। वर्ष 2020 का लोकमान्य तिलक नेशनल अवार्ड वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद सोनम वांगचुक को दिया जाएगा। वांगचुक को यह सम्मान उनके द्वारा युवाओं में नवीन एवं रचनात्मक प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए दिया जा रहा है। लोकमान्य तिलक स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ.दीपक तिलक के अनुसार सोनम वांगचुक अपने स्वदेशी अभियान के जरिए लोकमान्य तिलक के विचारों को ही आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने भी स्वराज्य, स्वदेशी, राष्ट्रीय शिक्षा एवं बहिष्कार जैसे सिद्धांतों को आगे बढ़ाया था। 

चीनी वस्तुओं के बहिष्कार को लेकर चर्चा में हैं सोनम वांगचुक 

सोनम वांगचुक आजकल चीनी वस्तुओं के बहिष्कार को लेकर चर्चा में हैं। इस विषय पर उनके बनाए वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहे हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके शिक्षा पद्धति में सुधार के लिए उन्होंने 1988 में स्टूडेंट्स एजूकेशनल एवं कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (एसईसीएमओएल) की स्थापना की। इस संस्थान के परिसर में रोशनी एवं भोजन पकाने के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होता है। डॉ.दीपक तिलक मानते हैं कि लद्दाख सीमा पर चीन के साथ चल रहे विवाद के बीच सोनम वांगचुक द्वारा बताया जा रहा स्वनिर्भरता का सिद्धांत ही सही जवाब हो सकता है। 

जानिए सोनम वांगचुक के बारे में 

एक सितंबर 1966 को लद्दाख के एक छोटे से गांव उले ताक्पो में जन्मे सोनम वांगचुक ने कदम दर कदम अपनी उपलब्धियों से अपनी पहचान बनाई है। उन्हें नौ साल की उम्र तक स्कूल नहीं भेजा जा सका क्योंकि उनके घर के आसपास कोई स्कूल नहीं था। उनकी मां ने उन्हें घर पर ही शुरुआती शिक्षा दी। निशुल्क आवासीय स्कूल विशेष केन्द्रीय विद्यालय, दिल्ली में उन्होंने शुरुआती पढ़ाई की।

बाद में श्रीनगर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए उन्होंने लेह में दसवीं कक्षा के छात्रों को पढ़ाने के लिए पहला कोचिंग स्कूल खोला। इसके बाद धीरे-धीरे राज्य की लचर शिक्षा प्रणाली की पोल उनके सामने खुलने लगी। ल्‍म अभिनेता आमिर खान की सुपरहिट फिल्म 3 इडियट्स का मुख्य किरदार फुंसुख वांगड़ू सोनम वांगचुक पर आधारित था। सोनम वांगचुक को रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड सहित कई राष्‍ट्रीय-अंतरराष्‍ट्रीय अवॉर्ड मिले हैं।

 

Edited By: Arun Kumar Singh