बारामती का साम्राज्य और बेटों का भविष्य, क्या सुनेत्रा पवार की जिद रोक पाएगी शरद-अजीत गुट का महा-विलय?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़ों के संभावित विलय की अटकलें तेज हैं, लेकिन सुनेत्रा पवार अपने बेटों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

सुनेत्रा पवार की जिद से रुका NCP विलय

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। कुछ दिनों पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात एवं उसके बाद बीमार शरद पवार का हाल जानने के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उनसे फोन पर हुई आत्मीय बातचीत यह संकेत देती है कि भाजपा के साथ राकांपा के दोनों धड़ों का कुछ तो पक रहा है। लेकिन इसमें कुछ अड़चनें आ रही हैं, जिसकी जड़ में पवार परिवार की ही एक सदस्य एवं महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार का नाम उभरकर सामने आ रहा है।
इसी वर्ष 28 जनवरी को एक विमान दुर्घटना में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मृत्यु के बाद उनके स्थान पर उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री बनी थीं।
बाद में उनके द्वारा खाली की गई राज्यसभा की सीट पर उनके ज्येष्ठ पुत्र पार्थ पवार को भेजा गया। लेकिन सुनेत्रा पवार इसी इतने से संतुष्ट नहीं हैं।
वह भविष्य में अपने गृहनगर बारामती का साम्राज्य अपने छोटे पुत्र जय पवार के लिए सुरक्षित रखना चाहती हैं। जबकि इसी साम्राज्य पर पवार परिवार के दो और युवराजों रोहित पवार एवं युगेंद्र पवार की भी निगाहें हैं। रोहित फिलहाल बारामती के निकट की सीट करजत-जामखेड़ से दूसरी बार विधायक हैं। जबकि अजीत पवार के सगे भतीजे युगेंद्र पिछले विधानसभा चुनाव में अजीत पवार से ही हार चुके हैं।
चूंकि बारामती लोकसभा सीट पर लंबे समय से पहले शरद पवार और उनके बाद उनकी पुत्री सुप्रिया सुले जीतती रही हैं, लेकिन विधानसभा सीट एवं वहां के स्थानीय निकायों पर अजीत पवार का दबदबा रहा है। सुनेत्रा पवार यह दबदबा आगे भी कायम रखना चाहती हैं।
अजीत पवार के आकस्मिक निधन से पहले उस समय चल रहे स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान शरद पवार के नेतृत्ववाली राकांपा (शरद चंद्र पवार) एवं अजीत पवार के नेतृत्ववाली राकांपा करीब आए थे। अपने निधन से पहले एक भाषण में अजीत पवार दोनों दलों के विलय के संकेत भी दिए थे।
लेकिन उनके निधन के तुरंत बाद अजीत गुट के दो वरिष्ठ नेताओं प्रफुल पटेल एवं सुनील तटकरे ने यह कहकर विलय की संभावना से इनकार कर दिया था कि अजीत ने उनसे कभी इसकी कोई चर्चा नहीं की थी। और राजनीति में अपना एवं अपने पुत्र पार्थ का पांव जमाने के बाद अब सुनेत्रा पवार विलय से इनकार कर रही हैं। वह नहीं चाहतीं कि विलय के बाद पारिवारिक दबाव में उन्हें अपने पुत्रों के भविष्य से कोई समझौता करना पड़े।
संभवतः उनकी यही झिझक शरद पवार के भाजपानीत राजग के करीब आने में अड़चन बन रही है। शरद पवार की पार्टी के आठ सांसद हैं, जबकि सुनेत्रा पवार की पार्टी का सिर्फ एक। दूसरी ओर सुनेत्रा पवार की पार्टी के 41 और शरद पवार की पार्टी के सिर्फ 10 विधायक हैं।
दोनों दलों का विलय होने की स्थिति में न सिर्फ राज्य में राकांपा की ताकत बढ़ सकती है, बल्कि राजग का हिस्सा बनने के बाद केंद्र सरकार में सुप्रिया सुले को मंत्रीपद भी मिल सकता है। तब राकांपा का राजग के नजदीक आना केंद्र सरकार द्वारा लाए जानेवाले परिसीमन बिल में भी सहायक हो सकता है।
पवार के पारिवारिक सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री ने हाल ही में शरद पवार से बात करते हुए न सिर्फ उन्हें आराम करने की सलाह दी थी, बल्कि इस बात को लेकर भी आश्वस्त किया कि वह (प्रधानमंत्री) और सुप्रिया सुले देश का काम संभाल लेंगे। लेकिन राकांपा इस स्थिति तक तभी पहुंच सकती है, जब उसके दोनों घटकों का विलय होने के बाद वह राजग का हिस्सा बने। इसमें अड़चन पैदा कर रही है सुनेत्रा पवार की असुरक्षा की भावना, जो उनके पुत्रों के भविष्य को लेकर है।
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