मुंबई, आइएएनएस। Coronavirus: कोरोना वायरस संक्रमण से जंग के बीच उम्मीद की नई किरण दिखी है। महाराष्ट्र के विज्ञानी डॉ. प्रदीप वी महाजन ने स्टेम सेल आधारित इलाज का अनूठा तरीका विकसित किया है, जिससे कोरोना वायरस संक्रमण को आसानी से मारा जा सकता है। इससे मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत 65 से 75 फीसद तक कम हो जाती है। नवी मुंबई के यूरोलॉजिस्ट और रीजनरेटिव मेडिसिन रिसर्चर डॉ. प्रदीप ने कहा कि फेफड़े कोरोना वायरस संक्रमण का अहम निशाना होते हैं। इसी के कारण अस्पताल या आइसीयू में ज्यादा वक्त बिताना पड़ता है। इलाज के बाद भी मरीज को लंबे समय तक आक्सीजन की जरूरत पड़ती है।

उन्होंने कहा, 'ज्यादातर दवाओं व इलाज के तरीकों से इसलिए बहुत सकारात्मक नतीजे नहीं मिल पाते हैं, क्योंकि उन सबमें वायरस को निशाना बनाने की कोशिश होती है, उसके अनुकूल माहौल को नहीं। इसीलिए वायरस खुद में बदलाव करता रहता है और हम नए इलाज खोजते रहते हैं। मेरे इलाज की पद्धति बिलकुल सामान्य है। इसमें शरीर में उस माहौल को मजबूत दी जाती है, जिसमें वायरस प्राकृतिक रूप से मर जाता है।' स्टेमआरएक्स बायोसाइंसेज सॉल्यूशंस के संस्थापक डॉ. प्रदीप ने बताया कि इस पद्धति में ब्लड बैंक या किसी रक्त दाता के खून से प्लेटलेट्स निकालकर एक पाउडर जैसी दवा तैयार की जाती है। इसे नेबुलाइजर या रोटाहेलर की मदद से सीधे फेफड़े तक पहुंचा दिया जाता है। अभी उन्होंने सीमित मात्रा में इसे तैयार करने की मशीन बनाई है। उन्होंने कहा कि इलाज का यह तरीका किसी चमत्कार की तरह काम करता है।

पालघर में 103 वर्षीय व्यक्ति ने कोरोना को पराजित किया

इच्छाशक्ति हो तो आप बड़ी से बड़ी बाधा पार पा सकते हैं। यह चरितार्थ किया है महाराष्ट्र के पालघर के एक 103 वर्षीय बुजुर्ग ने जिन्होंने कोरोना जैसी महामारी को हरा दिया। अत्यंत संवेदनशील आयु वर्ग में होने के बावजूद वह कोविड-19 से उबर गए हैं। शामराव इंग्ले पालघर में विरेंद्र नगर के रहने वाले हैं। संक्रमित होने के बाद उन्हें ग्रामीण कोविड-19 अस्पताल में भर्ती कराया गया था। संक्रमण से मुक्त होने के बाद शनिवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। जिला कलेक्टर कार्यालय ने एक विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दी। अस्पताल के डाक्टरों के मुताबिक, बुजुर्ग को इलाज के लिए उपलब्ध कराई गई चिकित्सा का बेहतर प्रभाव रहा और उन्होंने कर्मचारियों के साथ सहयोग किया। शनिवार को वह पूरे हर्ष के साथ अस्पताल से बाहर निकले। पालघर के कलेक्टर डा. माणिक गुरसाल और अस्पताल के कर्मचारियों ने सौ साल पार कर चुके बुजुर्ग को पुष्प गुच्छ देकर विदा किया।