मुंबई, ओमप्रकाश तिवारी। देश में कोविड-19 की शुरुआत के बाद से कोरोना के सक्रिय मामलों एवं इससे मरने वालों की संख्या, दोनों में महाराष्ट्र शीर्ष पर रहा है। महाराष्ट्र के कई छोटे जिले भी इससे कोरोना की गंभीरता से अछूते नहीं रहे हैं। लेकिन इस विपत्ति में भी मराठवाड़ा के कुछ गांव स्वनियंत्रण अपनाकर न सिर्फ महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश को राह दिखा रहे हैं।

अपनायी स्वनियंत्रण प्रणाली

राज्य में कोरोना की गंभीर स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक यहां कोरोना के सक्रिय मामले 40 लाख के करीब पहुंच चुके हैं। इससे मरने वालों की संख्या 61 हजार पार कर चुकी है। इन परिस्थितियों पर नियंत्रण पाने के लिए राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार फिर से लाकडाउन लगाने पर बाध्य हो रही है। लेकिन इसी राज्य में मराठवाड़ा के कई गांव ऐसे हैं, जहां स्थानीय लोगों और ग्रामवासियों ने ही स्वनियंत्रण प्रणाली अपनाकर कोरोना को गांव से दूर रखने में सफल रहे हैं। इस सफलता में बड़ी भूमिका गांव के सरपंच, ग्राम सेवक, ग्रामवासी, खासतौर से गांव के युवक निभा रहे हैं। औरंगाबाद मराठवाड़ा के बड़े शहरों में गिना जाता है। वहां की स्थिति शुरू से विकट रही है।

गांव और शहर मिलाकर इस जनपद में अब तक 1543 मौतें हो चुकी हैं। लेकिन इसी जनपद के 308 गांव ने स्थानीय स्तर पर सख्ती बरतकर कोरोना से बचने में कामयाब रहे हैं। फुलबी तालुका का डेढ़ हजार आबादी वाले वाहेगांव ने अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। यहां बिना मास्क लगाए कोई भी अपने घर से बाहर नहीं निकल सकता। गांव के सभी बुजुर्गों को वैक्सीन लगवाने का लक्ष्य भी यहां पूरा किया जा चुका है। इस सख्ती के कारण ही अब तक यह गांव कोरोना से अछूता रहा है।

804 में से 226 गांवों को कोरोना छू तक नहीं पाया 

सरकारी रिकार्ड के मुताबिक परभणी जनपद की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं रही है। परभणी में अब तक कोरोना से 478 मौतें हो चुकी हैं। इसके बावजूद इस जनपद के 804 में से 226 गांवों को कोरोना छू तक नहीं पाया है। ऐसे ही एक गांव गोदावरी तांडा की महिला सरपंच सरूबाई चह्वाण बताती हैं कि बाहर से आने वाले किसी भी नागरिक को बिना जांच रिपोर्ट के गांव में प्रवेश नहीं दिया जाता।

इसी प्रकार नांदेड़ जनपद के कणकवाडी गांव के युवकों ने गांव के प्रवेशद्वार पर बारी-बारी से अपनी ड्यूटी लगाकर किसी भी संदिग्ध संक्रमित के गांव में प्रवेश पर रोक लगा रखी है। उस्मानाबाद के जायफल गांव में किसी भी हाटस्पाट से आने वाले व्यक्ति की सूचना तुरंत प्रशासन को दी जाती है। लातूर के कई गांवों ने बाहर से आनेवाले लोगों को छह-सात दिन तक गांव के बाहर आइसोलेशन में रखने एवं गांव के अंदर घर-घर जाकर लोगों की जांच करने का अभियान चलाकर खुद को कोरोना के कहर से बचा रखा है।  

 

Edited By: Babita Kashyap