राज्य ब्यूरो, मुंबई। मुंबई के साकीनाका क्षेत्र में दिल्ली के निर्भया कांड की तर्ज पर हुए दुष्कर्म कांड को सामना के संपादकीय में जौनपुर पैटर्न बताने पर राजनीति शुरू हो गई है। भाजपा के हिंदीभाषी नेताओं की तरफ से इसका तीखा जवाब देते हुए सामना के कार्यकारी संपादक व शिवसेना नेता संजय राउत को खरीखोटी सुनाई गई है।शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में सोमवार के अंक पर लिखा गया है कि साकीनाका प्रकरण की जांच यदि गहराई में जाकर करें तो यह पता चल जाएगा कि जौनपुर पैटर्न ने मुंबई में कितनी गंदगी मचा रखी है। पिछले सप्ताह मुंबई के साकीनाका क्षेत्र में हुई दुष्कर्म की घटना का एकमात्र आरोपी जौनपुर का मूल निवासी है।

जौनपुर को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश
सामना के संपादकीय में इसी तरफ इशारा करते हुए सीधे-सीधे उत्तर प्रदेश के एक जिले जौनपुर को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई है। इसका जवाब देते हुए जौनपुर के ही मूल निवासी भाजपा के महाराष्ट्र उपाध्यक्ष कृपाशंकर सिंह ने इस संपादकीय की भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सामना के कार्यकारी संपादक संजय राउत को ओछी राजनीति से बाज आने की सलाह दी है। सिंह के अनुसार संजय राउत सांसद हैं और उन्हें कानून की जानकारी भी है। इसके बावजूद उनके द्वारा दुष्कर्म व हत्या जैसी घोर निंदनीय घटना को किसी जिले का पैटर्न करार देना कतई उचित नहीं है। दरिंदा, दरिंदा होता है, उसका किसी जाति या जिले से कोई मतलब नहीं होता। सिंह ने संजय राउत को जौनपुर पैटर्न की जानकारी देते हुए कहा कि देश की आजादी की लड़ाई के समय जौनपुर के एक ही गांव से 21 लोगों ने अपनी कुर्बानी दी। जौनपुर में ऐसे कई गांव हैं, जहां के लोगों ने आजादी की लड़ाई में अपना बलिदान दिया। इसी प्रकार जौनपुर जिले के एक ही गांव से 40 आइएएस अफसर बने हैं। हर गांव से आइएएस और आइपीएस अफसर बनाना भी जौनपुर पैटर्न है।

संजय पांडे ने भी संजय राउत को घेरा

इसी प्रकार महाराष्ट्र भाजपा के उत्तर भारतीय मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष संजय पांडे ने भी संजय राउत को घेरते हुए कहा है कि गंदगी का विश्लेषण गंदगी में रहने वाले ही कर सकते हैं, कोई और नहीं। गुनहगार की कोई जाति, भाषा, धर्म, पंथ या प्रांत नहीं होता। वह सिर्फ गुनहगार ही होता है। पांडे ने सवाल किया है कि यदि साकीनाका में हुए दुष्कर्म कांड को जौनपुर पैटर्न करार दिया जा रहा है, तो क्या हाल ही में पुणे में हुए सामूहिक दुष्कर्म कांड को पुणे पैटर्न, औरंगाबाद में हुए दुष्कर्म कांड को औरंगाबाद पैटर्न व शिवसेना के मंत्री रहे संजय राठौर के दुष्कर्मों को बीड पैटर्न कहा जा सकता है। पिछले सप्ताह गुरुवार की रात मुंबई के साकीनाका क्षेत्र में एक 35 वर्षीय महिला के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। इसके बाद उसके निर्भया जैसी नृशंसता भी की गई थी। घटना के अगले दिन अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। राज्य सरकार ने उसकी दो बेटियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत 20 लाख की मदद देने की घोषणा की है। साथ ही, इस मामले का मुकदमा फास्ट ट्रैक में चलाने के लिए एक विशेष सरकारी वकील की नियुक्ति कर दी गई है।

साकीनाका कांड के पीछे पैसे के लेन-देन का विवाद: पुलिस

मुंबई, आइएएनएस। मुंबई के साकीनाका में महिला के साथ निर्भया जैसी दरिंदगी के तीन दिन बाद, पुलिस की जांच में जो तथ्य सामने आए उनसे पता चलता है है कि पैसों के लेन-देन को लेकर हुए विवाद की परिणति इतनी जघन्य घटना में हुई। यह जानकारी पुलिस आयुक्त हेमंत नगराले ने सोमवार को दी। नगराले ने बताया कि 45 वर्षीय आरोपित मोहन चौहान उप्र के जौनपुर कारहने वाला है। उसने अपना अपराध कुबूल कर लिया है। महिला और आरोपित एक-दूसरे को जानते थे और कई बार मिले चुके थे। उनके बीच पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ। इसी विवाद के कारण जघन्य वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त राड बरामद कर ली है। वारदात के वाद आरोपित ने उसे मौके से हटाकर कहीं छिपा दिया था। नागराले ने कहा कि पीड़िता चूंकि अनुसूचित जाति से संबंधित है, इसलिए पुलिस ने एससी/एसटी अत्याचार (रोकथाम) अधिनियम के तहत भी धाराएं बढ़ाई हैं।

Edited By: Sachin Kumar Mishra