मुंबई, राज्य ब्यूरो। शिवसेना महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ सरकार चला रही है। इसके बावजूद वह कांग्रेस की स्थिति पर यदाकदा टिप्पणियां करने से नहीं चूकती। कांग्रेस में इन दिनों मची भगदड़ पर शिवसेना ने तंज करते हुए कहा है कि उसकी स्थिति बादल फटने जैसी हो गई है। वह पैबंद भी कहां-कहां लगाए? कांग्रेस ने हाल ही में उदयपुर चिंतन शिविर का आयोजन किया था। इस शिविर का समापन होते-होते पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ व गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिये इसी पर टिप्पणी की है। सामना ने अपने संपादकीय में लिखा है, सुनील जाखड़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे बलराम जाखड़ के सुपुत्र हैं। पंजाब कांग्रेस का उन्होंने कई वर्षों तक नेतृत्व किया। परंतु नवजोत सिद्धू को व्यर्थ महत्व मिलने से जाखड़ हाशिये पर फेंक दिए गए। आखिरकार उन्होंने भाजपा की राह पकड़ ली। उन्होंने पार्टी छोड़ते समय कांग्रेस नेतृत्व से सवाल पूछा कि मैं पंजाब और राष्ट्रहित की बात ही कर रहा था। परंतु उस पर कांग्रेस ने मुझे 'नोटिस' देकर क्या हासिल किया?

सुनील जाखड़ और हार्दिक पटेल के पार्टी छोड़ने का मुद्दा उठाया

इसी प्रकार हार्दिक पटेल नामक युवा नेता जब कांग्रेस में आया तो लगा कि गुजरात कांग्रेस में बहार आ जाएगी। परंतु हार्दिक को राज्य के कार्यकारी अध्यक्ष की हैसियत से काम ही नहीं करने दिया जाता था। हाथ-पांव बांधकर रेस में उतारा गया, ऐसा हार्दिक पटेल का कहना है। हार्दिक ने जाते-जाते राहुल गांधी पर हमला किया है कि देश और पार्टी को जब सर्वाधिक जरूरत होती है, तब कांग्रेस का नेतृत्व हमेशा देश के बाहर होता है। हार्दिक ने यह भी कहा है कि आए दिन अंबानी-अदाणी को कोसने से कुछ हासिल नहीं होगा। गुजरात में हर युवक सोचता है कि हम भी अदाणी-अंबानी बनें। ये उनके आदर्श हैं। उनके आदर्श पर हमला करके गुजरात विधानसभा का चुनाव कैसे लड़ेंगे? सामना लिखता है कि कांग्रेस ने देशभर में 6,500 पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की नियुक्ति का निर्णय किया है। परंतु उत्तर प्रदेश-बिहार जैसे राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष तक नहीं हैं। इन दो बड़े राज्यों में नेतृत्व के बिना ही चिंतन शिविर संपन्न हुआ। राहुल गांधी ने चिंतन शिविर में कई सवालों को बीच में ही छोड़ दिया। इसी वजह से कई नेता कांग्रेस छोड़ते नजर आ रहे हैं। 2024 की तैयारी मोदी और उनकी पार्टी द्वारा अलग ढंग से किए जाने के दौरान कांग्रेस में 'रिसाव' का आपातकाल ही चल रहा है। संसदीय लोकतंत्र के लिए यह दृश्य अच्छा नहीं है। जाखड़, हार्दिक के बाद भी अन्य नेताओं के जाने की आशंका है। इन सुरागों को सिओगे कैसे?

Edited By: Sachin Kumar Mishra