'...पार्टी छोड़ने से ज्यादा दर्दनाक', बालासाहेब के लिए भतीजे राज ठाकरे का छलका दर्द
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे को श्रद्धांजलि देते हुए अपने दर्द को साझा ...और पढ़ें

राज ठाकरे ने बालासाहेब को श्रद्धांजलि में गहरा दर्द व्यक्त किया।

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राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा है कि पार्टी छोड़ने के बाद शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे से अक्सर न मिल पाना पार्टी छोड़ने से भी ज्यादा दर्दनाक था। उन्होंने अपने दिवंगत ताऊ को एक ऐसे पर्वत के रूप में वर्णित किया जो उनके पीछे सदैव खड़ा रहा।
शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' में शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर प्रकाशित श्रद्धांजलि लेख में राज ठाकरे ने अपने ताऊ के साथ अपने गहरे संबंधों को याद करते हुए कहा कि पारिवारिक घर 'मातोश्री' को छोड़ने का व्यक्तिगत नुकसान, 2005 में उनके पार्टी छोड़ने से कहीं अधिक था।
राज ठाकरे ने बालासाहेब को दी श्रद्धांजलि
राज ने याद किया है कि 1991 में जब वे अविभाजित शिवसेना के छात्र विंग के प्रमुख थे, तब उन्होंने दक्षिण मुंबई के काला घोड़ा में एक मोर्चा निकाला था। तब बाल ठाकरे ने उनका भाषण एक सार्वजनिक लैंडलाइन फोन के माध्यम से सुना था।
मनसे प्रमुख ने यह भी याद किया कि जब वह बचपन में जलने से घायल हो गए थे, तो उनके चाचा ने दो महीने तक एंटीसेप्टिक से उनके घावों की देखभाल की थी।
राज लिखते हैं कि जब मैंने (अविभाजित शिवसेना से) अलग होने का फैसला किया तो एक बात जो मुझे सबसे ज्यादा परेशान कर रही थी, वह यह थी कि मैं पहले की तरह अपने लोगों से बार-बार नहीं मिल पाऊंगा।
पार्टी छोड़ने से अधिक मातोश्री छोड़ने का दुख
मैंने अपने पिता को खो दिया था, और अब मैं अपने ताऊ से बहुत दूर जा रहा था। यह सोच मुझे अंदर ही अंदर खा रही थी। पार्टी छोड़ने से ज्यादा दुख मुझे घर (मातोश्री) छोड़ने से हुआ। बता दें कि राज ने 2005 में अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे को दोषी ठहराते हुए शिवसेना छोड़ दी थी।
करीब छह माह पहले दोनों भाइयों में फिर बातचीत शुरू हुई है, और दोनों की पार्टियों ने गठबंधन करके मुंबई महानगरपालिका का चुनाव भी लड़ा। लेकिन ठाकरे बंधुओं के इस पुनर्मिलन का कोई फायदा नहीं हुआ।
साथ आकर भी दोनों भाई इतनी सीटें नहीं जुटा सके, जिससे मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) या मनसे का महापौर बन सके। राज ठाकरे ने लिखा है कि मेरे ताऊ बालासाहेब केशव ठाकरे का मेरे बचपन और वयस्क जीवन पर गहरा प्रभाव था। वे एक पर्वत की तरह मेरे पीछे खड़े रहे।
बालासाहेब को अपने पीछे खड़ा पर्वत बताया
राज ने याद किया कि एक बार जब एक ट्रक उस वाहन को लगभग टक्कर मारते-मारते बचा, जिसमें वह यात्रा कर रहे थे, तब बाल ठाकरे ने उन्हें फोन करके उनका हालचाल पूछा था।
शिवसेना संस्थापक की कुछ सुखद आदतों याद करते हुए राज ने लिखा है कि हालांकि बाल ठाकरे पाकिस्तान के विरोधी थे, लेकिन उन्होंने मेहंदी हसन और गुलाम अली की गजलें सुनना कभी बंद नहीं किया।
बोफोर्स घोटाले के दौरान अमिताभ बच्चन और उनके भाई अजिताभ के लिए नकारात्मक प्रचार की समस्या का समाधान करते हुए उन्होंने अमिताभ बच्चन को तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह को पत्र लिखने का सुझाव दिया था, और उनका दावा था कि उस पत्र से नकारात्मक प्रचार को कम करने में मदद मिली।
बालासाहेब ने लोगों को हिंदुत्व की ताकत का एहसास कराया: राज
राज ठाकरे पर शुक्रवार को बालासाहेब ठाकरे के जन्मशताब्दी समारोह में बोलेते हुए यह दावा भी किया कि बालासाहेब ठाकरे ने ही लोगों को हिंदुत्व की ताकत का एहसास एक मतदाता की शक्ति के रूप में कराया था।
नगरपालिका चुनाव परिणामों के बाद पहली बार दोनों ठाकरे बंधु उद्धव और राज ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंच साझा किया। यह समारोह मुंबई के षड्मुखानंद सभागार में आयोजित किया गया था।
मुंबई के शनमुखानंद सभागार में दिवंगत की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आगे बोलते हुए राज ने कहा कि भारतीय राजनीति में बालासाहेब जैसा दुर्लभ और ताकतवार व्यक्तित्व, और उनके जैसा नेता दूसरा कोई नहीं था।
महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए मनसे प्रमुख ने कहा कि आज की राजनीति ऐसी है, जैसे कोई नीलामी हो रही हो, जहां सत्ता का खुलेआम सौदा हो रहा है। शायद यह अच्छा ही हुआ कि अभी जो कुछ हो रहा है, उसे देखने के लिए बालासाहेब जीवित नहीं है।
