राष्ट्रपति मुर्मु ने किया नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ का ध्वजारोहण, अगले 21 महीनों तक चलेगा मेला
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नासिक के रामकुंड में पारंपरिक ध्वजारोहण कर ऐतिहासिक सिंहस्थ कुंभ मेले का विधिवत शुभारंभ किया, जो अगले 21 महीनों तक चलेगा।

HighLights
राष्ट्रपति मुर्मु ने रामकुंड में सिंहस्थ कुंभ का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने त्र्यंबकेश्वर में ध्वजारोहण कर शुरुआत की।
यह ऐतिहासिक कुंभ मेला अगले 21 महीनों तक चलेगा।
राज्य ब्यूरो, मुंबई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को गोदावरी नदी के तट पर स्थित रामकुंड में पारंपरिक 'ध्वजारोहण' कर ऐतिहासिक नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले का विधिवत शुभारंभ किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राष्ट्रपति ने पूजा-अर्चना की और धार्मिक ध्वज फहराया।
इस गरिमामयी अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। दूसरी ओर ठीक उसी समय नासिक नगर से करीब 30 किमी. दूर त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दोपहर ठीक 12:02 बजे पारंपरिक ध्वज फहराया। इस अवसर पर शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य विधुशेखर भारती भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
रामकुंड में अनुष्ठान पुरोहित संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर पंचाक्षरी और सिंहस्थ समिति के मुख्य ट्रस्टी सतीश शुक्ला द्वारा संपन्न कराया गया। कुंभ मेले के इस पावन आगाज से पूर्व शुक्रवार को तपोवन मैदान से रामतीर्थ पंचवटी होते हुए रामकुंड तक भव्य 'महाध्वज ग्राम परिक्रमा' निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं और साधु-संतों ने हिस्सा लिया।
शनिवार से शुरू हुआ यह सिंहस्थ कुंभ मेला अगले 21 महीनों तक चलेगा और 24 जुलाई 2028 को समाप्त होगा। त्र्यंबकेश्वर में इसका समापन 27 फरवरी 2028 को होगा। मेले का पहला 'अमृत स्नान' अगले वर्ष दो अगस्त को आषाढ़ सोमवती अमावस्या के अवसर पर होगा। इसके बाद दूसरा अमृत स्नान 31 अगस्त (श्रावण अमावस्या) और तीसरा 11 सितंबर (भाद्रपद शुद्ध एकादशी) को निर्धारित है।
परंपरा के अनुसार, वैष्णव अखाड़े 11 सितंबर को नासिक स्थित रामकुंड में स्नान करेंगे, जबकि शैव अखाड़े इसके अगले दिन त्र्यंबकेश्वर स्थित कुशावर्त कुंड में स्नान करेंगे। बता दें कि देश में लगने वाले कुंभों में अकेला नासिक का सिंहस्थ कुंभ ही ऐसा है, जिसमें वैष्णव अखाड़े नासिक में गोदावरी नदी में, तो शैव अखाड़े वहां से 30 किमी. दूर त्र्यंबकेश्वर स्थित कुशावर्त कुंड में स्नान करते हैं।
शनिवार को इस पावन अवसर पर रामकुंड स्थित प्राचीन श्री गंगा गोदावरी मंदिर के कपाट भी 11 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने त्र्यंबकेश्वर का दौरा कर शैव अखाड़ों के साधु-महंतों से भी मुलाकात की। इसके बाद वे पुनः नासिक लौटकर रामकुंड में भव्य 'गोदा आरती' में शामिल हुईं। इस आरती में करीब 6,657 जनजातीय श्रद्धालुओं ने एक साथ भाग लिया।
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