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पालघर हॉस्पिटल हिंसा: 16 सितंबर तक हिरासत में रहेंगे विधायक के बेटे समेत 22 आरोपी, अदालत ने दिया आदेश

Published: Tue, 15 Sep 2026 04:02 PM (IST)

पालघर अस्पताल हिंसा मामले में विधायक के बेटे रोहित गावित और शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख कुंदन सांखे सहित 22 ...और पढ़ें

पालघर अस्पताल हिंसा केस में पुलिस हिरासत में भेजे गए सभी आरोपी।

पालघर अस्पताल हिंसा केस में पुलिस हिरासत में भेजे गए सभी आरोपी।

HighLights

  1. विधायक के बेटे रोहित गावित समेत 22 गिरफ्तार।

  2. अस्पताल हिंसा मामले में 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत।

  3. तोड़फोड़, धमकी और हमले के आरोप में कार्रवाई।

डिजिटल डेस्क, पालघर। पालघर अस्पताल हिंसा मामले में गिरफ्तार 22 लोगों को स्थानीय अदालत ने 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। रविवार देर रात मजिस्ट्रेट योगेश एच. गजभिये के आदेश पर पुलिस कस्टडी में भेजे गए लोगों में विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित और शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख कुंदन सांखे शामिल हैं।

5 और 6 सितंबर की दरमियानी रात सेना के कार्यकर्ता पालघर के रिलीफ हॉस्पिटल में घुस गए, जहां दही-हंडी समारोह में हिस्सा लेने वाले कुछ घायल 'गोविंदा' भर्ती थे। दावा किया कि अस्पताल बहुत ज्यादा फीस ले रहा है। उन्होंने कथित तौर पर प्रॉपर्टी में तोड़फोड़ की, डॉक्टरों को धमकाया, स्टाफ मेंबर्स पर हमला किया और एक घायल व्यक्ति को आईसीयू से जबरदस्ती ले गए।

कौन-कौन सी धराएं लगाई गईं?

भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशन्स (हिंसा और संपत्ति को नुकसान या हानि की रोकथाम) अधिनियम के तहत दंगा करने, मारपीट, आपराधिक धमकी, बिना इजाजत घुसने, गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने और अन्य अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए 22 लोगों की पहचान की है।

शिवसेना पालघर शहर के प्रमुख राहुल घरत को इस मामले में 7 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था, जबकि रोहित गावित और 12 'गोविंदा' को 11 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, सांखे और अन्य ने रविवार को सरेंडर कर दिया।

मांगी गई पांच दिन की पुलिस कस्टडी

सरकारी वकील की तरफ से पेश होते हुए सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर निशा जाधव ने वॉयस सैंपल इकट्ठा करने, मोबाइल डिवाइस जब्त करने और बेंगलुरु सर्वर से क्लाउड-स्टोर सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित करने के लिए पांच दिन की पुलिस कस्टडी मांगी।

हालांकि, बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी बिना किसी गैर-कानूनी इरादे के सिर्फ एक घायल दोस्त से मिलने गए थे और कोर्ट से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की अपील की। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद मजिस्ट्रेट गजभिये ने आदेश दिया कि अपराध की गंभीरता और प्रथम दृष्टया स्पष्ट संलिप्तता को देखते हुए पुलिस हिरासत जरूरी है।

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