राकांपा में नेतृत्व की जंग: पदाधिकारियों की लिस्ट से प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे का नाम गायब; सुनेत्रा पवार ने दी सफाई
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व और संगठन पर नियंत्रण को लेकर तनातनी बढ़ गई है, जिसमें सुनेत्रा पवार द्वारा चुनाव ...और पढ़ें

सुनेत्रा पवार ने दी सफाई (फोटो-पीटीआई)
HighLights
सुनेत्रा पवार की सूची से प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे गायब।
सुनेत्रा ने इसे 'लिपिकीय त्रुटि' बताकर सफाई दी।
राकांपा में 'पवार बनाम बाहरी' की लड़ाई तेज।
ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के भीतर नेतृत्व और संगठन पर नियंत्रण को लेकर चल रही तनातनी अब खुलकर सामने आ गई है।
पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में केंद्रीय चुनाव आयोग को भेजी गई पदाधिकारियों की नई सूची से दो वरिष्ठ नेताओं प्रफुल पटेल एवं सुनील तटकरे का नाम गायब है।
इसके साथ ही भेजी गई 22 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची में उनका नाम तो शामिल किया गया है, लेकिन उनके नामों के आगे किसी भी पार्टी पद का उल्लेख नहीं किया गया है। इन दोनों सूचियों पर सवाल उठने के बाद सुनेत्रा पवार ने एक्स हैंडल पर सफाई देते हुए इसे ‘लिपिकीय’ गलती बताया है।
सोमवार देर रात राकांपा पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी की सूची के सार्वजनिक होते ही जब राकांपा के भीतर और बाहर विवाद गहरा गया है। इन सूचियों में पार्टी की कमान पूरी तरह पवार परिवार के हाथों में केंद्रित होती दिख रही है।
गलती से जारी हुई लिस्ट?
इस नई सूची में सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में दर्शाया गया है, जबकि उनके बेटों—पार्थ पवार को राष्ट्रीय महासचिव और जय पवार को राष्ट्रीय सचिव जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये दोनों सूचियां 29 अप्रैल को चुनाव आयोग को भेजी गई थीं।
इन सूचियों पर विवाद गहराने के बाद अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने अपने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' पर पोस्ट कर डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू की है। उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए लिखा कि मीडिया में प्रसारित हो रही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों की सूची में कुछ लिपिकीय और तकनीकी त्रुटियां (क्लेरिकल मिस्टेक्स) हो गई हैं। इस प्रशासनिक चूक को जल्द ही सुधार लिया जाएगा।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग को 29 अप्रैल को भेजी गई आधिकारिक सूची में इतनी बड़ी लापरवाही महज एक 'लिपिकीय गलती' नहीं हो सकती।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस पूरे विवाद को प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल जैसे वरिष्ठ नेताओं के पर कतरने की सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के असामयिक निधन के बाद से ही राकांपा में वर्चस्व की जंग छिड़ी हुई है। आरोप हैं कि अजीत पवार के निधन के तुरंत बाद प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे ने सुनेत्रा पवार और उनके बेटों को विश्वास में लिए बिना चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा था।
इस पत्र में मांग की गई थी कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यकारी अध्यक्ष (प्रफुल पटेल) को ही पार्टी के सभी व्यापक और अंतिम निर्णय लेने का अधिकार दिया जाए।
यह पत्र सामने आने के बाद से ही पवार परिवार इन वरिष्ठ नेताओं से असंतुष्ट बताया जा रहा था। माना जा रहा है कि सुनेत्रा पवार अब पार्टी संगठन पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना चाहती हैं, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की बगावत या तख्तापलट की स्थिति को रोका जा सके।
राकांपा की इस आंतरिक कलह पर विपक्षी दलों, विशेषकर शरद पवार गुट ने तीखा तंज कसा है। विपक्ष का कहना है कि जो नेता शरद पवार के साथ गद्दारी करके अलग हुए थे, आज उन्हीं के राजनीतिक वजूद को पार्टी के भीतर समाप्त किया जा रहा है।
बहरहाल, सुनेत्रा पवार भले ही इसे तकनीकी खामी बताकर शांत करने की कोशिश कर रही हों, लेकिन इस सूची ने साफ कर दिया है कि राकांपा में 'पवार बनाम बाहरी' की आंतरिक लड़ाई आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति को एक नया मोड़ देने वाली है।
