मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर जान गंवाने वाले दंपत्ति के परिजनों को मिलेंगे 1.80 करोड़ रुपये, MACT का बड़ा फैसला
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 2018 में हुए एक दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले दंपत्ति के परिजनों को MACT ने 1.80 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

(AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे हादसे में MACT का अहम फैसला।
मृतक दंपत्ति के परिजनों को 1.80 करोड़ मुआवजा।
कार चालक 70%, ट्रक ड्राइवर 30% जिम्मेदार।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 2018 में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में आज आठ साल बाद मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) का बड़ा फैसला सामने आया है।
MACT ने इस हादसे में जान गंवाने वाले पति-पत्नी के परिजनों को 1.80 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस दिल दहला देने वाले हादसे में दंपत्ति की मौत हो गई थी, जबकि उनके दो छोटे बच्चे बाल-बाल बच गए थे।
समझिए क्या था पूरा मामला?
बता दें कि यह घटना 23 दिसंबर 2018 की है। जब अंकित भूपिंदर सिंह चुघ अपनी वैगन-आर कार से अपनी पत्नी संजना और दो बच्चों के साथ कहीं जा रहे थे। रास्ते में आगे चल रहे एक ट्रक ने अचानक ब्रेक लगा दिए, जिससे उनकी कार पीछे से ट्रक में जा घुसी।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार ट्रक के पीछे फंस गई और एक किलोमीटर से ज्यादा दूर तक घिसटती चली गई। बाद में पनवेल के ग्रामीण अस्पताल में इलाज के दौरान अंकित और उनकी पत्नी संजना की मौत हो गई।
कोर्ट का फैसला और किसकी कितनी गलती?
एमएसीटी (MACT) सदस्या गौरी कावडिकर ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों की दलीलों पर गौर किया। कोर्ट ने माना कि आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाए रखना और गाड़ी की गति पर नियंत्रण रखना ड्राइवर की जिम्मेदारी है। यदि स्पीड कंट्रोल में होती, तो समय पर ब्रेक लगाकर हादसे से बचा जा सकता था। इसलिए कोर्ट ने कार चला रहे अंकित को 70% जिम्मेदार माना।
ट्रक ड्राइवर की लापरवाही भी
दूसरी ओर बीच सड़क पर अचानक ब्रेक लगाने के लिए ट्रक ड्राइवर की लापरवाही और rash driving को 30% जिम्मेदार ठहराया गया। बीमा कंपनी ने यह दलील दी थी कि ट्रक का परमिट सिर्फ राजस्थान और गुजरात के लिए वैध था और उसके पास महाराष्ट्र में चलने का परमिट नहीं था।
इस पर MACT ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी सबसे पहले मुआवजे की पूरी रकम पीड़ित परिवार को चुकाएगी। इसके बाद, बीमा कंपनी को यह कानूनी छूट होगी कि वह उतनी रकम सीधे ट्रक मालिक से वसूल कर सकती है।
किसे कितना मुआवजा मिला?
गौरतलब है कि मृतक दंपत्ति अपनी-अपनी नौकरियों में कार्यरत थे, संजना 'सामसिध माउंट लिट्रा जी स्कूल' में काम करती थीं, जबकि अंकित डेल इंटरनेशनल सर्विसेज (Dell) में सीनियर डिलीवरी स्पेशलिस्ट थे।
उनकी आय और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कुल 1.80 करोड़ रुपये का मुआवजा तय किया गया। इसके तहत संजना की मृत्यु पर ₹92,53,500 और अंकित की मृत्यु पर ₹88,45,732 का मुआवजा तय किया गया है।
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