मुंबई: बिना चीर-फाड़ के मात्र 10 मिनट में पोस्टमार्टम, केईएम अस्पताल में शुरू होने जा रही हाई-टेक वर्चुअल ऑटोप्सी
मुंबई के केईएम अस्पताल में 17 करोड़ रुपये की लागत से एक हाई-टेक वर्चुअल ऑटोप्सी सेंटर स्थापित किया जाएगा। यह ...और पढ़ें

ऑपरेशन करते डॉक्टरों की तस्वीर(फाइल)।
HighLights
केईएम अस्पताल में 17 करोड़ की लागत से वर्चुअल ऑटोप्सी सेंटर।
बिना चीर-फाड़, 3D इमेजिंग से 10 मिनट में पोस्टमार्टम संभव।
महाराष्ट्र का पहला हाई-टेक फोरेंसिक वर्चुअल ऑटोप्सी केंद्र।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की चिकित्सा व्यवस्था में अहम कड़ी शामिल होने जा रही है। शरीर के अंदर गोली का रास्ता, चाकू के घाव की गहराई या कोई छिपा हुआ फ्रैक्चर अब इन सबको बिना शरीर पर एक भी चीरा लगाए देखा जा सकेगा।
परेल स्थित नगर निगम के केईएम (किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल) अस्पताल में एक हाई-टेक 'वर्चुअल ऑटोप्सी' (virtual autopsy) सेंटर बनने जा रहा है। इससे फोरेंसिक विशेषज्ञ पारंपरिक तरीके से शरीर को चीर-फाड़ करने के बजाय, स्कैन और थ्रीडी (3D) इमेज की मदद से शवों की जांच कर सकेंगे।
17 करोड़ की लागत से बनेगा परिसर
शुक्रवार (30 अक्टूबर) को BMC ने 17 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले एक आधुनिक मॉर्चरी कॉम्प्लेक्स (शवगृह परिसर) के लिए टेंडर जारी किया। यह परिसर ग्राउंड फ्लोर के अलावा पांच मंजिला होगा और इसमें मुख्य रूप से 'नॉन-इनवेसिव' (बिना चीरा लगाए की जाने वाली) ऑटोप्सी पर ध्यान दिया जाएगा।
क्या होगा खास
यह सेंटर एडवांस इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल करेगा, जिससे विशेषज्ञों को अंदरूनी चोटों की जांच करने और हिंसक या संदिग्ध मामलों में मौत के कारण और तरीके का पता लगाने में मदद मिलेगी। यह महाराष्ट्र का अपनी तरह का पहला सेंटर होगा। इसके अलावा, भायखला स्थित सरकारी जेजे अस्पताल में भी ऐसी ही सुविधा शुरू करने की योजना है।
2021 में एम्स से हुई थी शुरुआत
दिल्ली के एम्स (AIIMS) ने मार्च 2021 में 'वर्चुअल ऑटोप्सी' (जिसे 'वर्टोप्सी' भी कहा जाता है) की शुरुआत की थी। AIIMS की टीम के रिसर्च पेपर के अनुसार, उनका CT स्कैनर कुछ ही सेकंड में शरीर की 25,000 इमेज ले सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 10 मिनट का समय लगता है, जबकि पारंपरिक पोस्टमार्टम में चार से छह घंटे तक का समय लग सकता है। इससे पुलिस को काफी फायदा होगा।
11 महीने में तैयार होगा प्रोजेक्ट
KEM प्रोजेक्ट को 'टर्नकी' आधार पर पूरा किया जाएगा। इसके लिए 5 नवंबर को प्री-टेंडर मीटिंग रखी गई है और बोलियां जमा करने की आखिरी तारीख 19 नवंबर है।
अस्पताल के डीन डॉ. हरीश पाठक ने बताया कि एक बार टेंडर तय हो जाने के बाद, यह प्रोजेक्ट 11 महीने के भीतर तैयार हो जाना चाहिए। हरीश पाठक इस प्रोजेक्ट के प्रभारी हैं वो देश के जाने-माने फॉरेंसिक विशेषज्ञ हैं।
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