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मुंबई के ऐतिहासिक बाणगंगा टैंक में सैड़कों मछलियां की मौत, BMC ने बुलाई आपात बैठक

Published: Mon, 05 Oct 2026 07:02 PM (IST)

मुंबई के ऐतिहासिक बाणगंगा टैंक में सैकड़ों मछलियां मृत पाई गईं, जिसके बाद बीएमसी ने स्थानीय निवासियों और पुजारियों के साथ आपात बैठक बुलाई है।

HighLights

  1. सैकड़ों मछलियां मुंबई के बाणगंगा टैंक में मृत मिलीं।

  2. बीएमसी ने निवासियों और पुजारियों के साथ आपात बैठक बुलाई।

  3. टैंक की सफाई तेज, पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। दक्षिण मुंबई के वालकेश्वर में ऐतिहासिक बाणगंगा टैंक में सैकड़ों मछलियां मरी हुई मिलां हैं, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों का ध्यान इस ओर गया है।

बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने मछलियों की मौत के बाग उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा करने के लिए सोमवार को स्थानीय निवासियों और पुजारियों के साथ बैठक बुलाई है। यह बैठक नगर निकाय के डी वार्ड कार्यलय में होगी।

टैंक की सफाई के काम में तेजी

नगर निकाय ने सफाई का काम तेज कर दिया है और टैंक पर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रही है। इसने एक एरेशन पंप भी लगाया है और टैंक का पानी निकालकर उसे दोबारा भरने का काम भी करेगी। मछलियों की मौत के बाद BMC ने पानी के नमूने जांच के लिए भेजे हैं। यह समस्या पहले भी हो चुकी है।

2025 में, BMC ने तीन दिनों में बाणगंगा से लगभग 10,000 किलोग्राम मरी हुई मछलियां, फूलों का कचरा और अन्य जैविक सामग्री हटाई थी।

नगर निकाय ने पहले भी इस जगह पर कचरा इकट्ठा करने के लिए डिब्बे उपलब्ध कराए हैं और इस ऐतिहासिक जलाशय की सफाई का काम किया है।

बाणगंगा की सुरक्षा को लेकर जनहित याचिका दायर

वालकेश्वर के निवासी संजय शिर्के, जिन्होंने बाणगंगा की सुरक्षा के उपायों की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की है, उन्होंने इस ऐतिहासिक जलाशय को बचाने के लिए और कड़े कदम उठाने की मांग की है।

BMC का कहना है कि इस जगह पर दखल देने की उसकी क्षमता सीमित है क्योंकि बाणगंगा निजी स्वामित्व में है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकार क्षेत्र में आती है। निवासियों ने धार्मिक अनुष्ठानों के लिए एक वैकल्पिक सुविधा की भी मांग की है।

बाणगंगा मुंबई के ऐतिहासिक तीर्थ स्थल में से एक

बाणगंगा मुंबई के ऐतिहासिक जलाशयों में से एक है और सदियों पुराना एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, भगवान शिव की पूजा करने से पहले भगवान राम ने जमीन पर तीर चलाकर यहां गंगा की एक धारा बनाई थी।