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MPSC पेपर लीक मामले पर बड़ा एक्शन, सभी अध्यक्षों की होगी जांच; सीएम फडणवीस ने राज्यपाल से की सिफारिश

Published: Tue, 06 Oct 2026 08:35 PM (IST)

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के प्रश्नपत्र लीक विवाद में पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों व सदस्यों ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री ने एमपीएससी अध्यक्षों के आचरण की जांच की सिफारिश की।

मुख्यमंत्री ने एमपीएससी अध्यक्षों के आचरण की जांच की सिफारिश की।

HighLights

  1. मुख्यमंत्री ने एमपीएससी अध्यक्षों के आचरण की जांच की सिफारिश की।

  2. पुणे में छात्रों का छह दिवसीय प्रदर्शन, विपक्ष का समर्थन मिला।

  3. सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन माह में रिपोर्ट आएगी।

राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एमपीएससी के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों तथा सदस्यों के आचरण और कार्यप्रणाली की जांच के लिए समिति गठित करने की सिफारिश राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से की है।

एमपीएससी के छात्र राकांपा (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार के नेतृत्व में पुणे में पिछले छह दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन को समर्थन देने सीजेपी के अध्यक्ष अभिजीत दिपके और मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल भी पहुंच चुके हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत एमपीएससी के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों तथा सदस्यों के आचरण और कार्यप्रणाली की जांच के लिए समिति गठित करने की सिफारिश राज्यपाल को भेजी है। समिति की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने और तीन महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री की सिफारिश ऐसे समय आई है, जब एमपीएससी उम्मीदवार पुणे में लगातार छह दिनों से आंदोलन कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारी एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे समेत परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और कथित पेपर लीक की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उम्मीदवारों की मांगों में एमपीएससी परीक्षाओं के वस्तुनिष्ठ अथवा वर्णनात्मक प्रारूप को लेकर भी बदलाव शामिल हैं। सरकार ने पहले ही संकेत दिया था कि अनुच्छेद 317 के तहत आयोग के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों व सदस्यों के कामकाज की न्यायिक जांच कराई जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, समिति की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने एमपीएससी सचिव पद पर प्रतिनियुक्त महेंद्र उत्तमराव हरपालकर की प्रतिनियुक्ति भी समाप्त कर दी है। मुख्यमंत्री से एमपीएससी उम्मीदवारों के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद सरकार ने 30 सितंबर को जांच का आश्वासन दिया था। बता दें कि एमपीएससी के ड्रग इंस्पेक्टर पद की भर्ती परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक के बाद यह विवाद गहराया।

आयोग ने 29 जुलाई 2025 को 506 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। 22 मार्च को छह संभागीय मुख्यालयों पर स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित हुई और 12 जून को परिणाम घोषित किया गया। प्रारंभिक जांच के बाद 506 उम्मीदवार साक्षात्कार के लिए पात्र पाए गए। इनमें से 488 के साक्षात्कार एक से 22 जुलाई के बीच हुए। इसके बाद 485 पात्र और तीन अपात्र उम्मीदवारों की अनंतिम सामान्य योग्यता सूची जारी की गई।

22 से 26 जुलाई के बीच आयोग को उम्मीदवारों और जनप्रतिनिधियों से शिकायतें मिलीं कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र या प्रश्न मिल गए थे और बाद में इन्हें सोशल मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर प्रसारित किया गया। शिकायतों के बाद आयोग ने भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी।

आंदोलन को सोमवार को विपक्षी नेताओं और मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल का समर्थन मिला। एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार और जितेंद्र आह्वाड ने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। आह्वाड ने कहा कि यदि पेपर लीक अध्यक्ष के कार्यकाल में हुआ है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

जरांगे ने छात्रों से एकजुट रहकर आंदोलन जारी रखने और सरकार से उनकी मांगें जल्द पूरी करने की अपील की। इससे पहले राकांपा (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने भी सरकार से प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत कर समाधान निकालने का आग्रह किया था। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सात या आठ अक्टूबर को पुणे में आंदोलनरत एमपीएससी उम्मीदवारों से मिलने की संभावना है।

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