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शिंदे गुट में शामिल हो गए शिवसेना यूबीटी के दो बागी सांसद, उद्धव का साथ छोड़ने की बताई वजह

Published: Mon, 22 Jun 2026 09:14 AM (IST)Updated: Mon, 22 Jun 2026 09:17 AM (IST)

महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) के दो बागी सांसद ओमराजे निंबालकर और नागेश आष्टीकर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए ...और पढ़ें

उद्धव ठाकरे गुट के दो बागी सांसदों ने थामा एकनाथ शिंदे का हाथ।

उद्धव ठाकरे गुट के दो बागी सांसदों ने थामा एकनाथ शिंदे का हाथ।

HighLights

  1. दो शिवसेना (यूबीटी) सांसद शिंदे गुट में हुए शामिल।

  2. ओमराजे निंबालकर, नागेश आष्टीकर ने पाला बदला।

  3. उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका।

महाराष्ट्र की सियासत में कई दिनों से चल रहे फेरबदल की राजनीति के बीच अब एक बड़ी खबर सामने आ रही है। शिवसेना (यूबीटी) के 6 बागी सांसदों में से दो सांसदों ने आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल होने का एलान कर दिया है।

ऐसे में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए इसे एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है और माना जा रहा है कि इसके बाद बाकी बचे 4 सांसद भी जल्द ही पाला बदल सकते हैं। हालांकि अभी जिन दो सांसदों ने शिंदे गुट में जाने का एलान किया है, उनके नाम धाराशिव (ओस्मानाबाद) के सांसद ओमराजे निंबालकर और हिंगोली के सांसद नागेश आष्टीकर है।

पिता के मर्डर केस के फैसले का इंतजार कर रहे थे निंबालकर

इस बात को ऐसे समझिए ओमराजे निंबालकर के इस फैसले की स्क्रिप्ट कुछ दिन पहले ही लिखी जा चुकी थी। उन्होंने संकेत दिया था कि वह अपने पिता पवनराजे निंबालकर के मर्डर केस का अदालती फैसला आने के बाद कोई कदम उठाएंगे।

शनिवार को सेशंस कोर्ट ने इस मामले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया, जिसके तुरंत बाद निंबालकर ने अपना रास्ता साफ कर लिया। दूसरी तरफ, हिंगोली के सांसद नागेश आष्टीकर ने तो बाकायदा फेसबुक लाइव पर आकर पाला बदलने का एलान किया।

उद्धव ठाकरे की मनाने की आखिरी कोशिश भी रही नाकाम

बता दें कि सांसदों के बागी रुख को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को भले ही उनकी आलोचना की थी, लेकिन शनिवार को उन्होंने निंबालकर को मनाने की आखिरी कोशिश की। उद्धव ने निंबालकर के करीबी सांसद कैलास पाटिल और विधायक वरुण सरदेसाई को उनके पास भेजा। संदेश यह था कि पुरानी बातों को भूलकर फिर से साथ काम करते हैं।

लेकिन निंबालकर, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत और अन्य नेताओं के बयानों से बेहद नाराज थे। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें उद्धव ठाकरे से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन राजनीतिक मजबूरियों के कारण वे शिंदे के ऑफर पर विचार कर रहे हैं। इसके बाद आखिरकार रविवार शाम को वह शिंदे गुट के नेताओं के साथ धाराशिव के लिए रवाना हो गए।

पार्टी छोड़ने पर निंबालकर ने क्या कहा?

पार्टी छोड़ने के बाद अपने गांव गोवर्धन वाड़ी में कार्यकर्ताओं के साथ बंद कमरे में बैठक के बाद निंबालकर ने कहा कि विपक्ष में रहकर अपने सियासी दुश्मनों से लड़ना अब मुमकिन नहीं है, क्योंकि उन्हें सत्ताधारी भाजपा का समर्थन हासिल है। निंबालकर ने कहा कि मैं सत्ता या पैसे के लालच में शिंदे जी के साथ नहीं जा रहा, बल्कि अपने राजनीतिक अस्तित्व और क्षेत्र के विकास के लिए यह फैसला ले रहा हूं।

आष्टीकर ने क्या कहा?

वहीं दूसरी ओर फेसबुक लाइव पर आष्टीकर ने कहा कि विपक्ष में रहकर अपने लोकसभा क्षेत्र में विकास कार्य कराना बेहद मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में होने के कारण हमें फंड की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है और हमारे प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिल पा रही है।

अब बाकी चार सांसद का रास्ता भी आसान, समझिए कैसे?

गौरतलब है कि कानूनी तौर पर अलग ग्रुप बनाने या दूसरी पार्टी में शामिल होने के लिए दो-तिहाई (2/3) सांसदों का साथ होना जरूरी है। अगर निंबालकर उद्धव के साथ रुक जाते, तो बाकी 5 सांसदों के लिए दल-बदल कानून से बचना मुश्किल होता।

लेकिन अब निंबालकर के जाने से बाकी 4 सांसदों के लिए भी शिंदे गुट में जाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। शिवसेना के एक नेता के मुताबिक, जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अगले एक-दो दिनों में इन सांसदों के शामिल होने का आधिकारिक एलान कर दिया जाएगा।