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Maharashtra MLC Election: महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव दोनों गठबंधनों के लिए कड़ी परीक्षा, जानें- कौन जीत सकता है कितनी सीटें

महाराष्ट्र विधान परिषद में विधायक कोटे से 11 सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की कड़ी परीक्षा होंगे। 288 सदस्यीय सदन में 14 रिक्तियां होने के कारण निर्वाचक मंडल की संख्या 274 है। उम्मीदवार के जीतने के लिए कोटा 23 का है।

By Jagran News Edited By: Siddharth Chaurasiya Fri, 21 Jun 2024 11:00 PM (IST)
राकांपा (शपा) के एक नेता का मानना है कि विधान परिषद के चुनाव निर्विरोध होने की संभावना है।

राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद में विधायक कोटे से 11 सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की कड़ी परीक्षा होंगे। 288 सदस्यीय सदन में 14 रिक्तियां होने के कारण निर्वाचक मंडल की संख्या 274 है। उम्मीदवार के जीतने के लिए कोटा 23 का है।

राज्य विधानमंडल के निचले सदन में संख्यात्मक ताकत के अनुसार, 11 सीटों में से मविआ को दो और सत्तारूढ़ गठबंधन को नौ सीटें मिल सकती हैं। भाजपा के पांच उम्मीदवार, जबकि शेष चार उम्मीदवार सहयोगी शिवसेना (शिंदे) और राकांपा (अजीत) के निर्वाचित हो सकते हैं। चुनाव 12 जुलाई को होंगे। नामांकन 25 जून से शुरू होंगे। भाजपा के पास 103 विधायक हैं।

अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के पास 40 और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 38 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, शिवसेना (यूबीटी) के पास 15 और शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के पास 10 विधायक हैं। राकांपा विधायक अशोक पवार और नवाब मलिक ने दोनों में से किसी भी गुट को समर्थन देने वाला हलफनामा नहीं दिया है।

राकांपा (शपा) के एक नेता ने मानना है कि विधान परिषद के चुनाव निर्विरोध होने की संभावना है। शिवसेना (यूबीटी) ने घोषणा की है कि वह चुनावों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी, क्योंकि शिवसेना और राकांपा के कई विधायक अयोग्यता की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। राकांपा (शपा) ने पहले ही पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी (पीडब्ल्यूपी) के जयंत पाटिल को समर्थन देने की घोषणा कर दी है।

कांग्रेस 25 जून को बैठक में निर्णय लेगी कि एक उम्मीदवार मैदान में उतारा जाए या दो। यदि कांग्रेस दो उम्मीदवार उतारती है, तो वह अपने साथी दलों शिवसेना (यूबीटी) और राकांपा (शपा) को मदद करने की स्थिति में नहीं रहेगी, क्योंकि निर्दलीय और कुछ छोटे दलों के विधायकों का समर्थन दोनों गठबंधनों में लगभग बराबर-बराबर बंटा हुआ है। इस चुनाव में कोई गठबंधन या दल हार का मुंह देखकर कुछ ही माह बाद होने जा रहे विधानसभा चुनाव में अपनी स्थिति खराब नहीं करना चाहेगा।