यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 18, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
स्वर्ण युग भाजपा के लिए है, देश का नहीं : शिवसेना
शिवसेना ने भाजपा को नसीहत दी है कि हाल में मिली जीतें भाजपा के लिए स्वर्ण युग ला सकती हैं, देश के लिए इनका ज्यादा मतलब नहीं है।

मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिनर पार्टी से लौटने के बाद शिवसेना ने फिर से अपने तेवर तल्ख कर लिए हैं। अपने मुखपत्र सामना के जरिए पार्टी नेतृत्व ने भाजपा को नसीहत दी है कि हाल में मिली जीतें भाजपा के लिए स्वर्ण युग ला सकती हैं, देश के लिए इनका ज्यादा मतलब नहीं है।
सामना के संपादकीय में लिखा गया है कि देश में बेरोजगारी की स्थिति पहले जैसी है। महाराष्ट्र में किसान फिर से बड़े पैमाने पर आत्महत्या का रास्ता अपनाने पर विवश हो रहे हैं तो महंगाई की स्थिति में कोई खास फर्क नहीं पड़ा है।
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जम्मू-कश्मीर में हालात बदतर होते जा रहे हैं तो कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर पाकिस्तान ने तीखे तेवर अख्तियार कर रखे हैं। देश के लिए इसे स्वर्ण युग नहीं कहा जा सकता है। पंचायत से लेकर संसद तक भाजपा के विजय अभियान की चर्चा करते हुए एनडीए के 33 सहयोगी दलों के बाबत भी संपादकीय में सवाल उठाया गया है। भाजपा से पूछा गया है कि आपको हमारी जरूरत है भी या नहीं, भाजपा स्पष्ट रुख दर्शाए।
शिवसेना नेतृत्व ने भाजपा को नसीहत दी है कि खुद को ताकतवर बनाने के अभियान में विपक्षी दलों को खत्म करना ठीक नहीं। जो भाजपा के खिलाफ बोलने लगे उसे राष्ट्रविरोधी का तमगा देना उचित नहीं है।
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संसदीय लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए जरूरी है कि सरकार विपक्षी दलों को भी जिंदा रखे, अन्यथा जो थोड़ा बहुत लोकतंत्र अभी बाकी है वह भी खत्म होते देर नहीं लगेगी।
गौरतलब है कि भुवनेश्वर राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक के दौरान पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि भाजपा अभी शिखर पर नहीं पहुंची है। वह तब संभव होगा जब पंचायत से लेकर संसद तक भाजपा ही दिखाई दे।