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लातूर में 7 साल पुराने दोहरे हत्याकांड मामले में पांच लोगों को उम्रकैद, खेत के रास्ते को लेकर हुआ था झगड़ा

Published: Wed, 30 Sep 2026 03:45 PM (IST)

लातूर की एक अदालत ने सात साल पुराने दोहरे हत्याकांड मामले में पांच लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

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HighLights

  1. लातूर अदालत ने सात साल पुराने मामले में फैसला सुनाया।

  2. खेत के रास्ते को लेकर हुए झगड़े में दो हत्याएं हुईं।

  3. पांच दोषियों को उम्रकैद और जुर्माना की सजा मिली।

डिजिटल डेस्क, लातूर। महाराष्ट्र के लातूर की एक अदालत ने सात साल पहले खेत तक जाने वाले रास्ते को लेकर हुए झगड़े में दो लोगों की हत्या और चार अन्य को घायल करने वाले जानलेवा हमले के मामले में पांच लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

नीलंगा के एडिशनल सेशन जज एस बी पवार ने 29 सितंबर को फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 अक्टूबर 2019 को आरोपी ने सुभाष दयानंद सुडे, दयानंद नामदेव सुडे और अन्य लोगों पर हमला किया, जब वे शिरूर अनंतपाल पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले डांगेवाड़ी में अपने खेत में काम कर रहे थे।

हमले में दो लोगों की हुई थी मौत

इस हमले में सुभाष सुडे और दयानंद सुडे की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 148 और 147 (दंगा), 143 और 149 (गैर-कानूनी जमावड़ा) और 504 (जानबूझकर अपमान) के तहत मामला दर्ज किया।

इस मामले की जांच तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर परमेश्वर बदाम ने की थी। इसके बाद पुलिस ने चश्मदीदों और घायल गवाहों के बयानों, मेडिकल सबूतों और जब्ती के रिकॉर्ड के आधार पर चार्जशीट दाखिल की।

14 गवाहों से हुई पूछताछ

ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों से पूछताछ की। कोर्ट ने मेडिकल ऑफिसर, चश्मदीद गवाहों, घायल गवाहों और जब्ती के पंच गवाहों के बयानों को अहम सबूत माना। पांच दोषियों की पहचान ज्ञानोबा अंगद ओनामे, जगन्नाथ विश्वंभर ओनामे, राजकुमार विश्वंभर ओनामे, राम बाबूराव ओनामे और भागवत बाबूराव ओनामे के तौर पर हुई है। ये सभी शिरूर अनंतपाल तालुका के डांगेवाड़ी के रहने वाले हैं।

अदालत ने क्या सजा सुनाई?

अदालत ने आईपीसी की धारा 149 के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 302 के तहत उनमें से हर एक को उम्रकैद और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर उन्हें अतिरिक्त छह महीने की जेल काटनी होगी। उन्हें धारा 307 और धारा 149 के तहत पांच साल की जेल और हर एक पर 3,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना न भरने पर तीन महीने की अतिरिक्त जेल की सजा का प्रावधान भी किया गया।

इसके अलावा, अदालत ने आईपीसी की धारा 148 के तहत तीन साल, धारा 147 के तहत दो साल और धारा 143 के तहत छह महीने की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक कपिल पंढरीकर पेश हुए।

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