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एंटीलिया बम कांड में सचिन वाझे को मिली जमानत, पांच जिलों में प्रवेश पर रोक

Published: Tue, 29 Sep 2026 08:27 PM (IST)

पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को एंटीलिया बम कांड और मनसुख हिरेन हत्या मामले में विशेष एनआईए अदालत से जमानत मिल गई है।

सचिन वाझे को अंटीलिया बम कांड में विशेष अदालत से जमानत मिली (फाइल फोटो)

सचिन वाझे को अंटीलिया बम कांड में विशेष अदालत से जमानत मिली (फाइल फोटो)

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राज्य ब्यूरो, मुंबई। उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी एसयूवी मिलने और कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में विशेष एनआईए अदालत ने मंगलवार को पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को जमानत दे दी।

विशेष न्यायाधीश चकोर एस. बाविस्कर ने कहा कि अभियोजन पक्ष वाझे के विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवादी गतिविधि का मामला प्रथमदृष्टया स्थापित करने में विफल रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि एंटीलिया के निवासियों को आतंकित किए जाने का कोई ठोस साक्ष्य रिकार्ड पर नहीं है।

सचिन वाझे को एंटीलिया बम कांड में जमानत मिली

अदालत ने वाझे को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। हालांकि, गवाहों के बयान दर्ज होने तक उनके मुंबई, नवी मुंबई, रायगढ़, ठाणे और पालघर जिलों में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। उन्हें सात दिन के भीतर इन जिलों से बाहर अपने प्रस्तावित निवास का पता बताने, पासपोर्ट जमा करने और प्रत्येक रविवार दोपहर 12 से तीन बजे के बीच स्थानीय पुलिस थाने में हाजिरी लगाने का निर्देश भी दिया गया है।

एनआइए और पुलिस के बुलाने पर उन्हें फोन या वीडियो काल के माध्यम से अपनी लोकेशन भी साझा करनी होगी। अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि अभियोजन के इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं है कि वाझे का उद्देश्य अंबानी परिवार के मन में आतंक पैदा करना था।

अदालत के अनुसार, घटना के बाद से अब तक अंबानी परिवार के किसी सदस्य या एंटीलिया में रहने वाले किसी व्यक्ति का बयान दर्ज नहीं किया गया है। ऐसे में यह निष्कर्ष निकालने का आधार नहीं है कि परिवार के सदस्यों को किसी तरह आतंकित किया गया था।

कोर्ट ने आतंकवादी गतिविधि का आरोप खारिज किया

न्यायाधीश ने यह भी उल्लेख किया कि घटना के बाद अंबानी परिवार का रोजमर्रा का कारोबारी कामकाज एक मिनट के लिए भी प्रभावित होने का कोई संकेत नहीं है। अदालत ने कहा कि अभियोजन के दावे के विपरीत, रिकार्ड पर ऐसा कोई तथ्य नहीं है, जिससे साबित हो कि इस घटना से परिवार के मन में आतंक पैदा हुआ।

अदालत ने टीलिया के बाहर खड़ी एसयूवी में मिली जिलेटिन की छड़ों का भी उल्लेख किया। न्यायाधीश के अनुसार, उनमें डेटोनेटर नहीं थे। ऐसे में प्रथमदृष्टया वे विस्फोट करने में सक्षम नहीं थीं। अदालत ने कहा कि इन परिस्थितियों में बरामदगी को यूएपीए की धारा 15 के तहत आतंकवादी कृत्य मानने के लिए आवश्यक तत्व स्थापित नहीं होते।

मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में अदालत ने माना कि उनकी मौत हत्या थी, लेकिन उसे सीधे तौर पर आतंकवादी कृत्य का परिणाम नहीं माना जा सकता। हत्या भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत स्वतंत्र अपराध है। इस प्रकार हत्या का आरोप और यूएपीए के तहत आतंकवादी गतिविधि का आरोप अलग-अलग आधार पर विचारणीय हैं।

13 मार्च, 2021 से हिरासत में थे वाझे 

वाझे 13 मार्च, 2021 से हिरासत में हैं। उनके वकीलों ने सहआरोपित प्रदीप शर्मा और सुनील माने को मिल चुकी जमानत का हवाला देते हुए समानता के आधार पर राहत मांगी थी। उन्होंने कहा कि मामले में 320 गवाह हैं और आरोपपत्र 14 हजार से अधिक पृष्ठों का है। ऐसे में निकट भविष्य में सुनवाई जल्दी पूरी होने की संभावना नहीं है।

बता दें कि 25 फरवरी, 2021 को दक्षिण मुंबई में एंटीलिया के पास विस्फोटक से भरी एसयूवी और धमकी भरा पत्र मिला था। वाहन के मालिक मनसुख हिरेन का शव पांच मार्च को ठाणे की एक खाड़ी में मिला था। एजेंसी ने वाझे पर अमीर लोगों को डराकर धन वसूलने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है।