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महाराष्ट्र में अवैध ‘एग डोनेशन’ रैकेट का पर्दाफाश, ईडी ने जब्त किए 29 लाख रुपये

Published: Thu, 22 Oct 2026 07:46 PM (GMT+05:30)

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महाराष्ट्र में महिलाओं को पैसे का लालच देकर अंडाणु निकलवाने वाले एक अवैध रैकेट का पर्दाफाश किया है।

ईडी ने महाराष्ट्र में अवैध एग डोनेशन रैकेट का पर्दाफाश किया

ईडी ने महाराष्ट्र में अवैध एग डोनेशन रैकेट का पर्दाफाश किया

HighLights

  1. ईडी ने महाराष्ट्र में अवैध अंडाणु दान रैकेट का पर्दाफाश किया

  2. जांच में 29 लाख रुपये नकद जब्त, बैंक लॉकर फ्रीज किए गए

  3. महिलाओं को लालच देकर अंडाणु निकलवाने का संगठित नेटवर्क सक्रिय था

राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को पैसे का लालच देकर उनके अंडाणु निकलवाने और उन्हें विभिन्न आइवीएफ केंद्रों व एआरटी बैंकों को उपलब्ध कराने के कथित रैकेट का प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पर्दाफाश किया है।

मनी लांड्रिंग की जांच के तहत गुरुवार को एजेंसी ने बताया कि इस मामले में 29 लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं। साथ ही कई बैंक लॉकर और म्यूचुअल फंड निवेश फ्रीज कर दिए गए हैं।

ईडी ने अवैध एग डोनेशन रैकेट का किया पर्दाफाश

ईडी ने 16 अक्टूबर को महाराष्ट्र के ठाणे, बारामती और नासिक जिलों में कुछ अस्पतालों और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आइवीएफ) केंद्रों पर छापेमारी की थी।

जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में महिलाओं की भर्ती करने और उनके अंडाणु विभिन्न चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाने के लिए एजेंटों का संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। ये एजेंट अलग-अलग प्रोपराइटरशिप फर्मों के माध्यम से गतिविधियां संचालित कर रहे थे।

ईडी के मुताबिक, आइवीएफ केंद्रों और एआरटी बैंकों के माध्यम से एजेंटों को महिलाओं के अंडाणु उपलब्ध कराने के बदले कमीशन मिलता था। महिलाओं को भी इसके लिए आर्थिक भुगतान किया जाता था।

एजेंसी को संदेह है कि इस नेटवर्क में आधार कार्ड, शपथपत्र, सहमति पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, पैन कार्ड, रक्त जांच रिपोर्ट और बीमा दस्तावेजों समेत कई कागजात कथित तौर पर फर्जी बनाए गए थे।

इन दस्तावेजों का इस्तेमाल अंडाणु दाताओं की वास्तविक पहचान छिपाने, बार-बार अंडाणु दान कराने और उनकी चिकित्सकीय फिटनेस को सही साबित करने के लिए किए जाने का संदेह है।

मंजुषा वानखेड़े समेत 17 लोगों पर धोखाधड़ी का केस

ईडी का कहना है कि महिलाओं को महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों के संस्थानों में भी अंडाणु निकलवाने के लिए भेजा गया, जिससे उनके स्वास्थ्य पर संभावित खतरा पैदा हुआ और निर्धारित चिकित्सकीय सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई। यह मामला ठाणे पुलिस की एफआइआर और आरोपपत्र पर आधारित है।

इसमें मंजुषा वानखेड़े समेत 17 लोगों पर धोखाधड़ी, जालसाजी और सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम तथा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की है। छापेमारी के दौरान नए डोनर एजेंटों की भी पहचान की गई है।