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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे हादसे में अनाथ हुए बच्चों को मिलेगा मुआवजा, दुर्घटना में पिता की 70% लापरवाही तय

Published: Sun, 01 Nov 2026 10:21 AM (IST)

दादर के दो भाइयों को 2018 में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में माता-पिता खोने के बाद ₹3.04 करोड़ से अधिक का मुआवजा मिला है।

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डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। साल 2018 में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में अपने माता-पिता को खोने वाले दादर के दो नाबालिग भाइयों और उनकी दादी को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने 3.04 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का फैसला सुनाया है।

हालांकि, बच्चों को मिलने वाली यह राशि संभावित 6.5 करोड़ रुपये से काफी कम है, क्योंकि अदालत ने कार चला रहे उनके पिता को हादसे के लिए 70% जिम्मेदार माना है।

अंकित चुघ की 70% लापरवाही तय

अधिकरण ने पाया कि कार चला रहे अंकित चुघ (34) आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाए रखने में विफल रहे और समय पर गति नियंत्रित नहीं कर सके। कार के अगले हिस्से को पहुंचे भारी नुकसान की तस्वीरों को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने माना कि कार तेज गति में थी।

इस आधार पर दुर्घटना के लिए अंकित को 70% और ट्रक चालक को 30% जिम्मेदार ठहराया गया। अंकित के लिए मूल मुआवजा 2.94 करोड़ रुपये तय किया गया था, लेकिन 70% लापरवाही की कटौती के बाद यह राशि घटकर 88.45 लाख रुपये रह गई।

दूसरी ओर, अंकित की पत्नी संजना (34) के मामले में अदालत का रुख अलग रहा। ट्रिब्यूनल ने कहा कि संजना कार में सिर्फ एक पैसेंजर थीं, इसलिए उनकी ओर से किसी तरह की लापरवाही का सवाल ही नहीं उठता। इस कारण उनके परिजनों को बिना किसी कटौती के पूरा 92.53 लाख रुपये का मूल मुआवजा मंजूर किया गया।

ब्याज मिलाकर कुल 3.04 करोड़ का भुगतान

दोनों दावों को मिलाकर कुल मूल मुआवजा 1.80 करोड़ रुपये बना। ट्रिब्यूनल ने याचिका दायर करने की तारीख 9 अप्रैल 2019 से लेकर फैसले की तारीख 29 अक्टूबर 2026 तक 9% प्रति वर्ष की दर से ब्याज देने का आदेश दिया, जो करीब 1.23 करोड़ रुपये हुआ। मूल राशि और ब्याज को मिलाकर कुल देय मुआवजा लगभग 3.04 करोड़ रुपये तय हुआ है।

अदालत ने निर्देश दिया है कि कुल मुआवजे में से बच्चों की दादी पूजा चुघ (64) को 11.38% हिस्सा मिलेगा, जबकि दोनों बेटों सिदक और समर्थ को 44.31% - 44.31% का बराबर हिस्सा दिया जाएगा।

बच्चों के बालिग होने तक उनके हिस्से का एक बड़ा हिस्सा राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। मृतक की विवाहित बहन द्वारा किए गए दावे को अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह आर्थिक रूप से उन पर निर्भर नहीं थीं।

23 दिसंबर 2018 को क्या हुआ था?

यह दर्दनाक हादसा 23 दिसंबर 2018 की सुबह करीब 5:30 बजे हुआ था। एक निजी कंपनी में कार्यरत अंकित चुघ वार्षिक आय ₹16.28 लाख अपनी शिक्षिका पत्नी संजना वार्षिक आय ₹1.50 लाख और दोनों बच्चों के साथ वैगनआर कार से जा रहे थे। रास्ते में राजस्थान के बांसवाड़ा की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के ट्रक से उनकी कार की भीषण टक्कर हो गई।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार ट्रक के साथ करीब एक किलोमीटर तक घिसटती चली गई। अंकित और संजना को पनवेल के ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हादसे में दोनों बच्चे भी घायल हुए थे।

बीमा कंपनी पहले करे भुगतान

मामले की सुनवाई के दौरान ट्रक चालक और मालिक पक्ष कोर्ट में हाजिर नहीं हुए, जिसके बाद उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई। ट्रक की बीमा कंपनी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने दलील दी थी कि दुर्घटना पूरी तरह अंकित की गलती से हुई थी।

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी की दलील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वह थर्ड-पार्टी देनदारी से पूरी तरह बच नहीं सकती। परमिट से जुड़ी शर्तों के उल्लंघन को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने पे एंड रिकवर का सिद्धांत लागू किया यानी बीमा कंपनी पहले पीड़ित परिवार को पूरी मुआवजा राशि का भुगतान करेगी और बाद में यह रकम ट्रक मालिक से वसूल सकती है।

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