'दुर्लभ से भी दुर्लभ', नासिक की कोर्ट ने चार साल की बच्ची से दुष्कर्म-हत्या के मामले में दोषी को सुनाई मौत की सजा
नासिक की फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने चार साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी विजय संजय खैरनार को मौत की सजा सुनाई है।
-1792207511374_m.webp)
दुष्कर्म-हत्या के दोषी को अदालत ने दी मौत की सजा। (प्रतीकात्मक तस्वीर।)
डिजिटल डेस्क, नासिक। महाराष्ट्र के नासिक जिले की एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने 24 वर्षीय एक मजदूर को चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या करने के जुर्म में मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस जघन्य अपराध को दुर्लभ से भी दुर्लभ (रेयरेस्ट ऑफ द रेयर) करार दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायालय और फास्ट-ट्रैक विशेष अदालत के न्यायाधीश के.जी. पालदेवार ने शुक्रवार को आरोपी विजय संजय खैरनार को मौत की सजा सुनाई। यह घटना एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए बर्बर दुष्कर्म और हत्या के लगभग एक साल बाद आई है। घटना के बाद राज्य के कई हिस्सों में भारी आक्रोश और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे।
पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने का भी आदेश
उत्तरी महाराष्ट्र के मालेगांव कस्बे की ट्रायल कोर्ट ने सजा सुनाते हुए इस अपराध को रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी का माना। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि पीड़िता के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। जेल में बंद आरोपी खैरनार और उसके वकील नीलेश राठी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में मौजूद थे।
बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने 30 सितंबर को फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी ठहराया था और शुक्रवार को सजा की घोषणा की। इस मामले में वरिष्ठ वकील उज्ज्वल निकम विशेष लोक अभियोजक थे और उनकी सहायता के लिए वकीलों हर्षद तिवारी, स्नेहा शर्मा और एस.के. सोनवणे की एक कानूनी टीम मौजूद थी।
क्या है मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 16 नवंबर 2025 को नासिक जिले के मालेगांव तालुका के एक गांव में वेल्डर और फर्नीचर का काम करने वाले खैरनार ने चार साल की बच्ची के साथ बलात्कार किया और बाद में गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।
पीड़िता अपने घर के पास दोस्तों के साथ खेलते समय लापता हो गई थी। बाद में उसका शव आरोपी के घर के पास एक मोबाइल फोन टावर के निकट मिला। मालेगांव तालुका पुलिस स्टेशन में खैरनार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या, बलात्कार, अपहरण और सबूत मिटाने से जुड़ी धाराओं के साथ-साथ प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।
17 नवंबर को गिरफ्तार हुआ आरोपी
इस अपराध की भयावह प्रकृति के कारण मालेगांव तालुका नासिक जिले के आसपास के इलाकों और राज्य के कुछ अन्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। अभियोजन पक्ष का मामला पूरी तरह से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और आखिरी बार एक साथ देखे जाने (लास्ट सीन टुगेदर) के सिद्धांत पर आधारित था।
सरकारी वकील के अनुसार, हत्या की पुष्टि करने के लिए गवाहों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट और मेडिकल जांच के बाद साबित हो गया कि यह एक हत्या थी। एसपीपी निकम ने दलील दी कि यह मामला दुर्लभतम से दुर्लभ श्रेणी में आता है। उन्होंने इस घटना को बिना किसी उकसावे के, बहुत ही बेरहमी से और जघन्य तरीके से किया गया अपराध बताया।
बच्चे आरोपी को दादा कहकर बुलाते थे
पीड़िता के परिवार की वकील स्नेहा शर्मा-ठाकरे ने तर्क दिया कि आरोपी ने जानबूझकर पीड़िता को निशाना बनाया। वह तो एक गली में अपने पांच पुरुष सहपाठियों के साथ खेल रही थी। शर्मा-ठाकरे ने बताया कि आरोपी को बच्चे दादा कहकर बुलाते थे। उसने पीड़िता को चॉकलेट का लालच दिया और अपने घर के अंदर ले गया, जहां उसने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया।
वकील ने बताया कि यौन उत्पीड़न के बाद आरोपी ने एक पतले धागे से बच्ची का गला घोंट दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसके बाद आरोपी ने खून के धब्बे धोए, खुद नहाया, शव को एक चादर में लपेटा और उसे अपने घर से 10 से 15 फीट दूर एक मोबाइल टावर परिसर में फेंक दिया।
