मुंबई, प्रेट्र। बांबे हाई कोर्ट ने माओवाद समर्थक दिवंगत पादरी स्टेन स्वामी द्वारा एलगार परिषद-नक्सली संपर्क मामले में दाखिल की गई अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह एक बेहतर व्यक्ति थे। उनके काम के लिए अदालत उनका सम्मान करती है। जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनजे नामदार की पीठ को सोमवार को सुनवाई के दौरान जानकारी दी गई कि 84 वर्षीय स्टेन स्वामी का पिछले दिनों होली फैमली अस्पताल में हृदय गति रुकने से निधन हो गया है। जस्टिस शिंदे ने कहा, 'सामान्य रूप से हमारे पास समय नहीं होता है, लेकिन मैंने स्वामी की अंत्येष्टि देखी। वह एक बेहतर इंसान थे। उन्होंने समाज की कई तरह की सेवा की। उनके काम के लिए हमारे दिल में बहुत सम्मान है। कानूनी तौर पर उनके खिलाफ क्या है, यह एक भिन्न मुद्दा है।

पीठ ने स्वामी की मौत के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) और न्यायपालिका की हुई आलोचना का उल्लेख किया। पीठ ने अफसोस जाहिर किया कि कई मामलों में सुनवाई की प्रतीक्षा में विचाराधीन कैदी जेल में बंद हैं। पीठ ने कहा कि स्वामी की मेडिकल आधार पर जमानत याचिका के साथ ही एलगार परिषद-नक्सली संपर्क मामले में अन्य सह आरोपितों की याचिका पर आदेश जारी करते समय वह निष्पक्ष बनी रही। हाई कोर्ट ने कहा कि किसी ने भी उल्लेख नहीं किया कि इसी अदालत ने वरवर राव की जमानत मंजूर की थी। एक अन्य मामले में हनी बाबू को उनकी पसंद के अस्पताल में भेजा। हमने कभी अनुमान नहीं लगाया था कि हिरासत में स्वामी की मौत हो जाएगी।

गौरतलब है कि एनआइए द्वारा आठ अक्टूबर, 2020 को रांची से गिरफ्तार किए जाने के बाद से वह जेल में थे। एनआइए ने उन्हें माओवादी संगठनों से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। स्टेन ने अपनी गिरफ्तारी को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी थी और बीमारी के आधार पर जमानत याचिका दायर की थी। बीमारी के कारण ही उन्हें तलोजा जेल से बांद्रा के होली फैमिली अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया था। पांच जुलाई, 2021 को ही उनकी जमानत याचिका पर मुंबई उच्च न्यायालय की एक पीठ में सुनवाई होनी थी। अपरान्ह 1.30 बजे उनका निधन हो जाने के बाद 2.30 बजे उनके वकील मिहिर देसाई ने अदालत को बताया कि उनका निधन हो गया है।

Edited By: Sachin Kumar Mishra