'गड्ढामुक्त सड़कें बनाने के लिए क्या 20 साल और चाहिए', बॉम्बे हाई कोर्ट की BMC को कड़ी फटकार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई की सड़कों की खस्ता हालत और रोड सेफ्टी पर बीएमसी के ढीले रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है।

बॉम्बे हाईकोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने मुंबई की सड़कों पर बीएमसी को कड़ी फटकार लगाई।
कोर्ट ने बीएमसी से पूछा, सड़कों को ठीक करने में कितना समय लगेगा।
बीएमसी और टीएमसी को कार्रवाई का डेटा और फोटो सबूत पेश करने का आदेश।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुंबई में सड़कों की खराब स्थिति वहां रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ा चिंता का विषय है। ऐसे में बीते सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई की सड़कों की खस्ता हालत और रोड सेफ्टी को लेकर बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के ढीले रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने बीएमसी से सीधे शब्दों में पूछा कि आखिर मुंबई की सभी सड़कों को चलने लायक बनाने के लिए नागरिक निकाय को और कितने साल लगेंगे?
मामले में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ए.एस. गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि सड़कों की हालत बेहद खराब है। अगर हम यह मान भी लें कि सड़कों पर गड्ढे नहीं हैं, तो भी वहां लाखों ऊबड़-खाबड़ बम्प्स (झटके देने वाले हिस्से) मौजूद हैं।
सड़कों की स्थिति पर हाई कोर्ट नाराज
हाई कोर्ट की बेंच ने कड़े शब्दों में कहा कि कभी हाई कोर्ट सड़क के रास्ते आकर देखिए कि कितनी बदतर हालत है। आपको काम करने के लिए कितने साल चाहिए? बीएमसी को 20 साल दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।
हाई कोर्ट ने बीएमसी और टीएमसी को दिए सख्त निर्देश
मामले में कोर्ट ने बीएमसी (BMC) और ठाणे नगर निगम (TMC) दोनों को अगले सोमवार तक अपने ऑनलाइन सिस्टम का पूरा डेटा पेश करने का आदेश दिया है। इसके तहत बीएमसी को कोर्ट के सामने शिकायतों पर की गई कार्रवाई के 'पहले और बाद' के फोटो सबूत पेश करने होंगे। इसके अलावा ठाणे नगर निगम को यह बताना होगा कि उन्होंने उस पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया या नहीं, जिन्होंने मैनहोल की वजह से अपने मासूम बच्चे को खो दिया था।
सालों से कागजों पर ही हैं आदेश
गौरतलब है कि यह पूरी सुनवाई मुंबई की सड़कों की बदहाली पर कोर्ट द्वारा खुद संज्ञान लिए गए मामले और वकील रुजू ठक्कर की एक याचिका पर हो रही थी। याचिका में मांग की गई है कि पिछले एक दशक से मुंबई की सड़कों को गड्ढामुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए जो आदेश दिए जा रहे हैं, उन्हें सख्ती से लागू किया जाए।
वकील रुजू ठक्कर ने साल 2023 के उस आदेश की याद दिलाई, जिसमें खुले मैनहोल पर लोहे की सुरक्षा ग्रिल (जालियां) लगाने को कहा गया था। उस समय बीएमसी ने काम पूरा करने के लिए एक साल का समय मांगा था।
