विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'SIR में वोटर्स का नाम कटने से नहीं रोक सकते...', बॉम्बे हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

Published: Mon, 05 Oct 2026 06:06 PM (IST)

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नाम हटाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई टाल दी है।

सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण हाईकोर्ट आदेश नहीं दे सकता

सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण हाईकोर्ट आदेश नहीं दे सकता

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान वोटर्स के नाम हटाए जाने को लेकर दायर याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है।

अदालत ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट में इस विषय पर पहले से सुनवाई चल रही है, इसलिए हाईकोर्ट इस संबंध में कोई आदेश पारित नहीं कर सकता। इसी आधार पर मामले की सुनवाई तीन सप्ताह के लिए टाल दी गई।

SIR का मामला पहले से SC में: हाई कोर्ट 

चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने अदालत में कहा कि SIR से जुड़े कई मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट पहले से विचार कर रहा है।

उन्होंने 24 नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का उल्लेख करते हुए बताया कि अलग-अलग हाईकोर्ट और राज्यों को ऐसे मामलों में स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने से रोका गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरिम आदेश अभी भी प्रभावी है और इसी याचिका पर भी लागू होता है।

याचिकाकर्ता सागर गवई की ओर से अधिवक्ता प्रकाश आंबेडकर ने अदालत को बताया कि याचिका का दायरा सीमित है। उन्होंने महाराष्ट्र के मतदाताओं के हितों की रक्षा का अनुरोध किया और कहा कि सुनवाई पूरी होने तक नाम हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जा सकती है।

अंतरिम राहत की मांग बॉम्बे हाईकोर्ट से खारिज 

अदालत ने स्वीकार किया कि आदेश में महाराष्ट्र का साफ उल्लेख नहीं है, फिर भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईआर संबंधी मुद्दों की सुनवाई जारी रहने के कारण समान मुद्दे पर समानांतर कार्रवाई की कोई आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि 8 अक्टूबर दूर नहीं है।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा मांगे गए अंतरिम राहत को भी अस्वीकार कर दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि यह जनहित याचिका नहीं बल्कि रिट याचिका है।

सुप्रीम कोर्ट में मामले के लंबित रहने के दौरान नाम न काटने का आदेश देना उचित नहीं होगा। इस तरह अदालत ने प्रक्रियागत सीमाओं का सम्मान करते हुए मामले को आगे की तारीख के लिए स्थगित कर दिया।