मुंबई (राज्य ब्यूरो)। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से उनके आवास 'मातोश्री' पर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को फिलहाल जाहिर नहीं किया गया है। लेकिन माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व अपनी पुरानी पीढ़ी से ठाकरे परिवार के संबंधों का इस्तेमाल पुन: संबंध सुधारने के लिए करना चाहता है।

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी एक समय में भाजपा की शीर्ष त्रिमूर्ति रहे अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी व जोशी में से एक हैं। इसलिए मातोश्री जाकर उद्धव ठाकरे से की गई उनकी मुलाकात को अहम माना जा रहा है। डॉ. जोशी बुधवार को दोपहर बांद्रा स्थित ठाकरे निवास पहुंचे और करीब एक घंटा शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के साथ रहे। लेकिन दोनों के बीच क्या बातचीत हुई, इसे साफ नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में शिवसेना को राजग का हिस्सा बनकर लड़ने के लिए मनाने के लिए डॉ. जोशी को भेजा था।

बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव के ठीक पहले शिवसेना-भाजपा का 25 साल से चला आ रहा गठबंधन टूट गया था। हालांकि चुनाव बाद शिवसेना पुन: भाजपा के साथ सरकार में शामिल हो चुकी है। केंद्र में भी उसके कोटे से एक मंत्री है। इसके बावजूद शिवसेना के तेवर भाजपा विरोधी ही दिखाई दे रहे हैं। उद्धव ठाकरे कई बार बयान दे चुके हैं कि अगला लोकसभा चुनाव शिवसेना अकेले लड़ेगी। भाजपा की ओर से उसे मनाने की कोशिशें भी की गई हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह स्वयं उद्धव ठाकरे से मिलकर बात कर चुके हैं। लेकिन उनके जाने के तुरंत बाद भी उद्धव की ओर से अकेले ही चुनाव लड़ने की बात दोहराई गई थी।

हाल ही में राज्यसभा के उपसभापति चुनाव के दौरान शिवसेना पहले राजग उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने को राजी नहीं थी। लेकिन माना जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष शाह एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बात करने के बाद शिवसेना ने राजग उम्मीदवार के पक्ष में वोट किया। हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उद्धव ठाकरे दिल्ली गए थे। उसी दौरान उनकी भाजपा के दो शीर्ष नेताओं लालकृष्ण आडवाणी एवं डॉ. मुरली मनोहर जोशी से भी मुलाकात हुई थी। ये दोनों नेता उद्धव के पिता स्व. बालासाहब ठाकरे के मित्र रहे हैं। माना जा रहा है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अब इन पुराने संबंधों का इस्तेमाल कर शिवसेना को मनाने की कोशिश में जुट गया है।

Posted By: Nancy Bajpai