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अति आत्मविश्वास में लगातार दूसरी बार नागपुर स्नातक क्षेत्र की सीट हारी भाजपा, कांग्रेस के अभिजीत वंजारी हुए विजयी

Published: Thu, 29 Oct 2026 08:41 PM (IST)

भारतीय जनता पार्टी नागपुर स्नातक क्षेत्र की विधान परिषद सीट लगातार दूसरी बार गंवा बैठी है, जिसे वह 52 वर्षों से जीतती आ रही थी।

नागपुर में बीजेपी लगातार दूसरी बार हारी

नागपुर में बीजेपी लगातार दूसरी बार हारी

HighLights

  1. भाजपा ने नागपुर स्नातक सीट लगातार दूसरी बार हारी।

  2. कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने सुधाकर कोल्हे को हराया।

  3. अति आत्मविश्वास और अवैध मतों से भाजपा को नुकसान।

ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। भारतीय जनता पार्टी नागपुर स्नातक क्षेत्र की विधान परिषद सीट लगातार दूसरी बार गंवा बैठी है, जहां लगातार 52 वर्ष तक उसे कोई हिला भी नहीं सका था।

प्रथम वरीयता में भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोल्हे अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी से चार हजार से अधिक मतों से आगे रहने के बावजूद दूसरी वरीयता के मतों की गिनती में उनसे पिछड़ गए, क्योंकि भाजपा ने दूसरी वरीयता के लिए ज्यादा प्रचार ही नहीं किया था। उसे उम्मीद थी कि वह प्रथम वरीयता के मतों से बड़ी जीत हासिल कर लेगी।

नागपुर स्नातक क्षेत्र के किसी उम्मीदवार को जीत के लिए 75,438 मतों की आवश्यकता थी। भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोल्हे को 60,924 और कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी को 56,630 मत मिले।

निर्दलीय उम्मीदवार नीलेश मास्टर को 24,249 मत मिले। चूंकि कोई उम्मीदवार जीत के निर्धारित 75,438 मतों के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका, इसलिए सभी उम्मीदवारों को दूसरी वरीयता के लिए प्राप्त मतों की गिनती शुरू हुई।

इस गिनती में कांग्रेस उम्मीदवार वंजारी लगातार बढ़ता बनाए रहे, और अंत में वह 3,271 मतों से जीतकर अपनी सीट बरकरार रखने में सफल रहे। मतो की गिनती में खास बात यह देखी गई कि निर्दलीय उम्मीदवार नीलेश मास्टर को मिले प्रथम वरीयता के मतपत्रों में दूसरी वरीयता के ज्यादातर मत अभिजीत वंजारी को मिले देखे गए।

दूसरी खास बात यह रही कि कुल मतों में अवैध पाए गए 15,032 मतों में 10,000 से अधिक अवैध मत सुधाकर कोल्हे के थे। मतगणना के समय मौजूद रहे सूत्रों के अनुसार सुधाकर कोल्हे के नाम के सामने जानबूझकर ऐसे-ऐसे निशान बनाए गए, या सीधे सुधाकर कोल्हे का नाम लिख दिया गया था, जिनकी उम्मीद किसी स्नातक क्षेत्र के मतदाता से नहीं की जा सकती।

10,000 अवैध मतों का यह भारी-भरकम आंकड़ा ही सुधाकर कोल्हे को प्रथम वरीयता से जीत में बाधक बन गया। इसे कहीं न कहीं भितरघात का परिणाम भी माना जा रहा है।

भाजपा स्नातक क्षेत्र की यह विधान परिषद सीट लगातार दूसरी बार हारी है। 2014 तक यह सीट लगातार 52 वर्ष तक भाजपा के पास रही थी। इसी सीट से 1990 तक वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधर फडणवीस विधान परिषद के सदस्य रहे थे।

उनके बाद लगातार चार बार नितिन गडकरी इसी सीट से जीते। 2014 में गडकरी के लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद उन्होंने अपने करीबी अनिल सोले को इस सीट से जितवाकर विधान परिषद में भेजा। सोले उससे पहले दो बार नागपुर के जिलाध्यक्ष, तीन बार पार्षद एवं एक बार नागपुर के महापौर रह चुके थे।

लेकिन 2020 में जब पार्टी ने अनिल सोले का टिकट काटकर पूर्व महापौर संदीप जोशी को लड़ाया तो वह कांग्रेस के अभिजीत वंजारी से हार गए। उनकी हार के साथ ही करीब 52 वर्ष बाद इस सीट पर भाजपा का वर्चस्व भी टूटा।

इस बार अभिजीत वंजारी से हारे सुधाकर कोल्हे दक्षिण नागपुर से विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। 2024 में फडणवीस ने उन्हें नागपुर पश्चिम सीट से विधानसभा चुनाव लड़वाया। लेकिन वह चुनाव हार गए। उनके चुनाव हारने के बाद से ही मुख्यमंत्री फडणवीस ने उनकी 2026 में होनेवाले विधान परिषद चुनाव की तैयारी शुरू करवा दी थी।

इस सीट पर शुरू से ही स्वयं मुख्यमंत्री रुचि ले रहे। 23 अक्तूबर को मतदान के दिन भी देवेंद्र फडणवीस ने खुद 18 बूथों पर जाकर मतदान की व्यवस्था देखी और कार्यकर्ताओं से बातकर उनका मनोबल बढ़ाया।

इसके बावजूद भाजपा उम्मीदवार कांटे की टक्कर में दूसरी वरीयता के मतों में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी से पीछे रह गए, और भाजपा को दूसरी बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गढ़ नागपुर में किरकिरी का सामना करना पड़ रहा है।

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