भाजपा अति आत्मविश्वास में लगातार दूसरी बारी हारी नागपुर स्नातक की सीट, कांग्रेस के प्रत्याशी ने दर्ज की जीत
भाजपा ने नागपुर स्नातक विधान परिषद सीट अति आत्मविश्वास के कारण दूसरी बार गंवा दी है, जहां कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने जीत दर्ज की।

भाजपा ने नागपुर स्नातक सीट लगातार दूसरी बार हारी।
HighLights
भाजपा ने नागपुर स्नातक सीट लगातार दूसरी बार हारी।
कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने दूसरी वरीयता से जीत दर्ज की।
भाजपा का अति आत्मविश्वास और अवैध मत हार का कारण।
ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। भारतीय जनता पार्टी नागपुर स्नातक क्षेत्र की विधान परिषद सीट लगातार दूसरी बार गंवा बैठी है, जहां लगातार 52 वर्ष तक उसे कोई हिला भी नहीं सका था।
प्रथम वरीयता में भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोल्हे अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी से चार हजार से अधिक मतों से आगे रहने के बावजूद दूसरी वरीयता के मतो की गिनती में उनसे पिछड़ गए, क्योंकि भाजपा ने दूसरी वरीयता के लिए ज्यादा प्रचार ही नहीं किया था। उसे उम्मीद थी कि वह प्रथम वरीयता के मतों से बड़ी जीत हासिल कर लेगी।
नागपुर स्नातक क्षेत्र की विधान परिषद सीट के लिए 1,50,876 मत पड़े थे। किसी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के मतों के आधार पर जीत के लिए 75,438 मतों की आवश्यकता थी। भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोल्हे को 60,924 और कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी को 56,630 मत मिले।
निर्दलीय उम्मीदवार नीतेश कराले को 24,249 मत मिले। चूंकि कोई उम्मीदवार जीत के निर्धारित 75,438 मतों के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका, इसलिए सभी उम्मीदवारों को दूसरी वरीयता के लिए प्राप्त मतों की गिनती शुरू हुई। दूसरी वरीयता की गिनती शुरू होने पर निर्दलीय उम्मीदवार नीतेश कराले के प्रथम वरीयता के मतदान वाले पर्चों पर दूसरी वरीयता के मतों की गिनती होनी थी।
लेकिन जिन 24,249 मतदाताओं ने नीतेश कराले को प्रथम वरीयता के मत दिए थे, उनमें से 8000 ने अपनी दूसरी वरीयता का मत कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में डाला था, और सिर्फ 2000 मतदाताओं ने अपना मत भाजपा के पक्ष में डाला था।
शेष 14,249 ने अपनी दूसरी वरीयता का मत किसी के भी पक्ष में नहीं डाला था। इस प्रकार दूसरी वरीयता में 8000 मत पाकर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी भाजपा के सुधाकर कोहले से 3,271 मतों से आगे निकल गए।
मतो की गिनती में खास बात यह देखी गई कि कुल मतों में अवैध पाए गए 15,032 मतों में 10,000 से अधिक अवैध मत सुधाकर कोहले के थे। मतगणना के समय मौजूद रहे सूत्रों के अनुसार सुधाकर कोहले के नाम के सामने जानबूझकर ऐसे-ऐसे निशान बनाए गए, या सीधे सुधाकर कोहले का नाम लिख दिया गया था, जिनकी उम्मीद किसी स्नातक क्षेत्र के मतदाता से नहीं की जा सकती।
10,000 अवैध मतों का यह भारी-भरकम आंकड़ा ही सुधाकर कोहले की प्रथम वरीयता से जीत में बाधक बन गया। भाजपा सूत्रों का कहना है कि सामान्यतया ऐसे चुनावों में बड़ी पार्टियां जातीय गणित या कुछ और समीकरण साधते हुए ऐसे डमी उम्मीदवार खड़ी करती हैं, जिनके दूसरी वरीयता के वोट वह अपने उम्मीदवार के लिए देने का आग्रह करती हैं।
भाजपा इस बार अतिआत्मविश्वास में यह मानकर चल रही थी, उसके उम्मीदवार को प्रथम वरीयता में ही 80,000 से अधिक वोट मिल जाएंगे। दूसरी ओर कांग्रेस ने प्रचार करते समय निर्दलीय नितेश कराले से उनकी दूसरी वरीयता के मत अपने उम्मीदवार को दिलवाने का आग्रह किया। यही आग्रह कांग्रेस की जीत का बड़ा कारण बना। इस सीट से गडकरी चार बार जीते हैं
भाजपा स्नातक क्षेत्र की यह विधान परिषद सीट लगातार दूसरी बार हारी है। 2014 तक यह सीट लगातार 52 वर्ष तक भाजपा के पास रही थी। इसी सीट से 1990 तक वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधर फडणवीस विधान परिषद के सदस्य रहे थे। उनके बाद लगातार चार बार नितिन गडकरी इसी सीट से जीते।
2014 में गडकरी के लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद उन्होंने अपने करीबी अनिल सोले को इस सीट से जितवाकर विधान परिषद में भेजा। सोले उससे पहले दो बार नागपुर के जिलाध्यक्ष, तीन बार पार्षद एवं एक बार नागपुर के महापौर रह चुके थे। लेकिन 2020 में जब पार्टी ने अनिल सोले का टिकट काटकर पूर्व महापौर संदीप जोशी को लड़ाया तो वह कांग्रेस के अभिजीत वंजारी से हार गए।
उनकी हार के साथ ही करीब 52 वर्ष बाद इस सीट पर भाजपा का वर्चस्व भी टूटा। इस बार अभिजीत वंजारी से हारे सुधाकर कोहले दक्षिण नागपुर से विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। 2024 में फडणवीस ने उन्हें नागपुर पश्चिम सीट से विधानसभा चुनाव लड़वाया। लेकिन वह चुनाव हार गए। उनके चुनाव हारने के बाद से ही मुख्यमंत्री फडणवीस ने उनकी 2026 में होनेवाले विधान परिषद चुनाव की तैयारी शुरू करवा दी थी।
इस सीट पर शुरू से ही स्वयं मुख्यमंत्री रुचि ले रहे। 23 अक्तूबर को मतदान के दिन भी देवेंद्र फडणवीस ने खुद 18 बूथों पर जाकर मतदान की व्यवस्था देखी और कार्यकर्ताओं से बातकर उनका मनोबल बढ़ाया। इसके बावजूद भाजपा उम्मीदवार कांटे की टक्कर में दूसरी वरीयता के मतों में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी से पीछे रह गए, और भाजपा को दूसरी बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गढ़ नागपुर में किरकिरी का सामना करना पड़ रहा है।
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