महाराष्ट्र: 'हाईवे का काम रुकने और शराब की समस्या के लिए ट्रंप जिम्मेदार', बीजेपी नेता का अजीबोगरीब बयान
महाराष्ट्र के एक बीजेपी नेता ने हाईवे निर्माण में देरी और शराब की खपत बढ़ने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया है।

महाराष्ट्र के बीजेपी नेता सुजय विखे पाटिल का ट्रंप पर हमला। (फाइल फोटो।)
HighLights
बीजेपी नेता ने हाईवे निर्माण में देरी के लिए ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया।
ट्रंप की नीतियों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और बिटुमेन प्रभावित हुआ।
नेता ने शराब की खपत बढ़ने का कारण भी ट्रंप को बताया।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र में एक बीजेपी नेता का कहना है कि राज्य के दो कस्बों को जोड़ने वाले हाईवे के निर्माण कार्य में देरी और शराब की खपत बढ़ने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप जिम्मेदार हैं।
अहमदनगर के पूर्व सांसद सुजय विखे पाटिल ने ट्रंप की खराब नीतियों को इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए जरूरी सामान की कमी से जोड़ने के लिए एक लंबी दलील दी।
'भगवान कसम ऐसा सनकी आदमी नहीं देखा'
बीजेपी नेता ने कहा, "भगवान की कसम मैंने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा सनकी आदमी कभी नहीं देखा। सुबह वह कहता है कि रुक जाओ और शाम को फिर बम गिराने लगता है... हमारे लिए बेहतर यही है कि हम उस आदमी के चक्कर में न पड़ें।"
'सभी को हो रही परेशानी'
उन्होंने अहिल्यानगर-मनमाड रोड प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए कहा, "आज तार (कोलतार) न मिलने की वजह से ठेकेदार को इसे दिल्ली से गाड़ियों के जरिए लाना पड़ रहा है। लागत ढाई गुना बढ़ गई है और बढ़ी हुई लागत के लिए मंजूरी की भी जरूरत है। ये तकनीकी दिक्कतें हैं... जो परेशानियां आपको हो रही हैं, वही मुझे भी हो रही हैं।"
'ट्रंप की वजह से ज्यादा शराब पीने लगे लोग'
उन्होंने आगे कहा, "ट्रंप के कामों से पैदा हुई उलझन की वजह से कुछ लोगों के शराब पीने की मात्रा बढ़ गई है।" दरअसल, अमेरिका-ईरान युद्ध ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर असर डाला है, क्योंकि अहम समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सामान्य आवाजाही बंद हो गई है।
हर जगह कच्चे तेल की कमी का असर पेट्रोलियम उत्पादों के प्रोडक्शन पर पड़ा है और बिटुमेन (जिसका इस्तेमाल सड़क बनाने के कामों में होता है) तेल रिफाइनिंग प्रोसेस का ही एक बाई-प्रोडक्ट है।
महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल के बेटे ने कहा कि ट्रंप की खराब नीतियों और महाराष्ट्र में सड़क निर्माण के काम को स्थानीय स्तर पर आ रही दिक्कतों के बीच यही कड़ी थी।
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