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'वंदे मातरम को उसका पूरा गौरव लौटाने में लग गए 80 वर्ष', अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में बोले अमित शाह

Published: Mon, 14 Sep 2026 03:51 PM (IST)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 6वें अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को पूर्ण ...और पढ़ें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह(फोटो: पीटीआई)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह(फोटो: पीटीआई)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को पूर्ण गौरव लौटाने में लगभग 80 वर्ष लग गए। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान में इस गीत की स्थायी और अटूट भूमिका को रेखांकित किया।

6वें अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि वंदे मातरम ने देश के स्वाधीनता आंदोलन में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी भूमिका निभाई थी। यह गीत आज भी भारत की सांस्कृतिक चेतना से गहराई से जुड़ा हुआ है।

क्या है इसका मूल उद्देश्य?

अमित शाह ने भारतीय भाषाओं के संवर्धन को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए कहा कि इसका मूल उद्देश्य भारत की समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के प्रति अधिक से अधिक जागरूकता फैलाना है।

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अर्थ अपनी संस्कृति और इतिहास के प्रति सजगता पैदा करना है। इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की भाषाई विविधता को हमारी ताकत के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी अलगाव या विभाजन के कारण के रूप में।

NEP का विरोध करने वालों को घेरा

गृह मंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उस प्रावधान का पुरजोर समर्थन किया, जो छात्रों को अपनी मातृभाषा के अतिरिक्त एक अन्य भारतीय भाषा सीखने के लिए प्रेरित करता है। शाह ने कहा कि इस प्रावधान का विरोध करने वाले लोग एक तरह का पाप कर रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नीति का मकसद किसी पर भी कोई विशेष भाषा थोपना नहीं है, बल्कि देशवासियों के बीच एक-दूसरे की भाषाओं और संस्कृतियों के प्रति समझ और अपनापन बढ़ाना है।

मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा

अमित शाह ने महाराष्ट्र की भाषाई विविधता की सराहना करते हुए उसे देश का सबसे बड़ा बहुभाषी राज्य करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने मराठी की समृद्ध साहित्यिक और ऐतिहासिक धरोहर को मान्यता देते हुए उसे क्लासिकल लैंग्वेज का दर्जा दिया है।

उन्होंने कहा कि यह हमारे प्रधानमंत्री मोदी ही थे जिन्होंने मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिलाने की पहल की। जब आप महाराष्ट्र की धरती पर कदम रखते हैं, तो पाते हैं कि वहां कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी, कन्नड़ और वारली जैसी कई भाषाएं फली-फूली हैं और उन्हें सम्मान मिला है। पूरे भारत में महाराष्ट्र से बड़ा कोई बहुभाषी क्षेत्र नहीं है।

मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य

गृह मंत्री ने आगे कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के माध्यम से पढ़ाई पर खास ध्यान दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने एनईपी के तहत प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में प्रदान करना अनिवार्य बनाया है।

शाह के ये विचार शिक्षा और सरकारी कामकाज में भारतीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा देने और भाषा, इतिहास व राष्ट्रीय पहचान के सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने के सरकार के व्यापक प्रयासों के तहत सामने आए हैं।

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