'औपनिवेशिक नजरिए ने भारतीयों में हीन भावना पैदा की', गृह मंत्री शाह बोले- ज्ञान किसी विचारधारा का बंधक नहीं
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत के ज्ञान को औपनिवेशिक नजरिए से प्रस्तुत कर देशवासियों के आत्मविश्वास को ठेस पहुंचाई गई।
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औपनिवेशिक नजरिए से भारत के ज्ञान को विकृत कर प्रस्तुत किया गया

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राज्य ब्यूरो, मुंबई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत के ज्ञान और सभ्यता को समझने के शुरुआती औपनिवेशिक प्रयासों में भारतीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता नहीं दी गई।
ज्ञान को जिस नजरिए से परिभाषित किया गया, उसका उद्देश्य केवल भारत को समझना नहीं, बल्कि यहां लंबे समय तक शासन करने की व्यवस्था को मजबूत करना था।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में भारत के ज्ञान को इस तरह प्रस्तुत किया गया, जिससे समाज में लघुता-ग्रंथि पैदा हो और नागरिकों के आत्मविश्वास को ठेस पहुंचे।
औपनिवेशिक नजरिए से भारत के ज्ञान को विकृत कर प्रस्तुत किया गया
मुंबई स्थित एशियाटिक सोसायटी में संबोधन के दौरान शाह ने कहा कि किसी सभ्यता का अध्ययन करना और उसे किसी बाहरी दृष्टिकोण से परिभाषित करना दो अलग बातें हैं।
अध्ययन करने वाला व्यक्ति उस सभ्यता को स्वीकार करता है और आवश्यकता पड़ने पर स्वयं को भी बदलता है, जबकि परिभाषित करने वाले के पीछे उसका उद्देश्य भिन्न होता है। उन्होंने कहा कि इंडोलाजी के शुरुआती दौर में भारत के इतिहास, भाषा, दर्शन, साहित्य, धर्म, पुरालेख, पुरातत्व और अन्य ज्ञान परंपराओं का अध्ययन मुख्यतः औपनिवेशिक नजरिए से हुआ।
शाह ने कहा कि जब किसी समाज के भीतर उसके अपने ज्ञान, इतिहास और क्षमता को लेकर हीन भावना पैदा कर दी जाती है, तो वह लंबे समय तक गुलामी का विरोध नहीं कर पाता।
औपनिवेशिक काल में भारत के ज्ञान के विशाल भंडार की व्याख्या भी इसी दृष्टिकोण से किए जाने का उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश को स्वतंत्र हुए आठ दशक से अधिक समय हो चुका है और परिस्थितियां बदल चुकी हैं।
प्राचीन पांडुलिपियों की खोज से भारत का ज्ञान पुनः स्थापित होगा
ऐसे में अब भारत के पास उपलब्ध ज्ञान के विशाल भंडार का उपयोग देश और विश्व के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सच्चा ज्ञान किसी विचारधारा का बंधक नहीं होता। ज्ञान स्वयं में एक विचारधारा है और उसे किसी सीमित दायरे में बांधना उसके मूल अर्थ को बदल देता है।
गृह मंत्री ने एशियाटिक सोसायटी से महाराष्ट्र के गांवों में पंडितों और पुश्तैनी परिवारों के पास सुरक्षित प्राचीन दस्तावेजों और पांडुलिपियों को खोजने तथा एकत्र करने के अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार के 'ज्ञान भारतम पांडुलिपि मिशन' के तहत देश की प्राचीन पांडुलिपियों में छिपे अगाध ज्ञान पर व्यापक शोध की जरूरत है।
शाह ने कहा कि इन पांडुलिपियों में भारत को आर्थिक और सुरक्षा के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बनाने की क्षमता रखने वाले ज्ञान के बीज मौजूद हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और महाराष्ट्र सरकार एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई को इस अभियान में हरसंभव सहायता और समर्थन उपलब्ध कराएगी।
