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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 12, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

907 किलो ड्रग्स मामले में पांच दिन से था फरार, अचानक थाने के सामने पहुंचा और खुद को मार ली गोली; पढ़ें पूरा मामला

Published: Sat, 12 Oct 2024 12:18 AM (IST)

भोपाल में बड़े ड्रग रैकेट और इसके कारखाने का खुलासा होने के मामले में शुक्रवार को नाटकीय घटनाक्रम में एक ...और पढ़ें

गुजरात एटीएस ने जब्त की थी 907 किलो एमडी।
गुजरात एटीएस ने जब्त की थी 907 किलो एमडी।

HighLights

  1. आरोपी को मंदसौर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
  2. भोपाल में हुआ था ड्रग्स कारखाने का खुलासा।
  3. उर्वरक बनाने वाली फैक्ट्री के नाम पर चल रहा था खेल।

जेएनएन, मंदसौर। भोपाल में पकड़ाई गई 907 किलो ग्राम एमडी ड्रग्स मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी के सहयोगी ने मंदसौर में थाने के बाहर अपने पैर में गोली मार ली। गौरतलब है कि गुजरात एटीएस ने पांच दिन पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 907 किलोग्राम एमडी ड्रग्स जब्त की थी।

इस मामले में हरीश आंजना नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया था। हरीश ने पुलिस को बताया था कि उसके इस काम में की मदद प्रेमसुख पाटीदार नाम का शख्स उसकी मदद करता था। प्रेमसुख मंदसौर के हथुनिया का रहने वाला है। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन हरीश की गिरफ्तारी वाले दिन से ही वह गायब था।

थाने के सामने मारी खुद को गोली

शुक्रवार को वह मंदसौर के अफजलपुर थाने में आत्मसमर्पण के लिए पहुंचा, लेकिन इससे पहले थाने के सामने उसने खुद को गोली मार रखी थी। पुलिस के मुताबिक उसने पूछताछ से बचने के लिए खुद को घायल किया है। फिलहाल, पुलिस ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। उसके उपचार के बाद पुलिस उससे पूछताछ करेगी।

इससे पहले, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और गुजरात एटीएस की कार्रवाई में भोपाल में पिछले दिनों एमडी ड्रग्स बनाने का कारखाना पकड़ा गया था। कारखाने से बड़ी मात्रा में एमडी ड्रग्स और अन्य सामग्री भी जब्त की गई थी।

(भोपाल में एक फैक्ट्री से 1,814 करोड़ रुपये कीमत की ड्रग्स जब्त की गई थी।(फोटो सोर्स: @sanghaviharsh))

तीन आरोपी गिरफ्तार

मामले में एनसीबी ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों में नासिक का सान्याल बाने, भोपाल का अमित चतुर्वेदी और मंदसौर का हरीश आंजना शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक कारखाने में एमडी ड्रग्स बनाने के लिए आरोपियों ने पार्ट्स खरीदकर मशीन को 'असेंबल' कराया था।

उन्होंने ऐसा इसलिए किया, ताकि किसी की नजर में न आएं। ये मशीनें आमतौर रासायनिक उर्वरक बनाने के काम आती हैं, लेकिन आरोपी इससे ड्रग्स बनाकर सप्लाई कर रहे थे। मंदसौर के शोएब लाला और हरीश आंजना ने मशीन लाने में पूंजी लगाई थी। जांच एजेंसियों का अनुमान है कि मशीनरी में 40 से 50 लाख रुपये लगे होंगे।

(उर्वरक बनाने वाली फैक्ट्री में बनाई जा रही थी ड्रग्स।)

कच्चा माल खरीदने का था लाइसेंस

एमडी ड्रग बनाने में लगने वाले केमिकल और कच्चा माल खरीदने के लिए अमित चतुर्वेदी के पास पहले से लाइसेंस था, इसलिए उसे आसानी से सामग्री मिल जाती थी। यह जानकारी एनसीबी के अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आई है। आरोपियों ने उर्वरक बनाने वाली फैक्ट्री को इसलिए किराए पर लिया था, जिससे लोगों का शक न हो।

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