बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सहित संबंधित पक्षों को नोटिस
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बैगा आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कुपोषण ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने बालाघाट बच्चों की मौत पर नोटिस जारी किया।
कुपोषण, बीमारी और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी मुख्य कारण।
केंद्र सरकार सहित संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर-बिरसा क्षेत्र में बैगा आदिवासी बहुल गांवों में बच्चों की मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कुपोषण, संक्रामक बीमारियों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए जनहित याचिका दायर की गई है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
बच्चों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
याचिका बालाघाट निवासी अजब लाल लिल्हारे ने दायर की है। उनकी ओर से अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने अदालत में पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए बच्चों की मौतों पर चिंता जताई।
याचिका में मांग की गई है कि प्रभावित आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए, बच्चों के समय पर टीकाकरण और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित हो तथा उन्हें पर्याप्त पोषण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही बच्चों की मौतों के कारणों की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठाई गई है।
स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण और टीकाकरण पर सवाल
याचिकाकर्ता का आरोप है कि दूरस्थ आदिवासी गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। समय पर टीकाकरण, पौष्टिक आहार की उपलब्धता और बीमारियों की पहचान कर तत्काल उपचार देने की व्यवस्था में भी गंभीर कमियां हैं।
याचिका में मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में संबंधित पक्षों के जवाब के बाद मामले में आगे की दिशा स्पष्ट होगी।
मौत के आंकड़ों पर कांग्रेस और प्रशासन के अलग-अलग दावे
बालाघाट के बिरसा क्षेत्र के गांवों और मंझरे-टोलों में बच्चों की मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कांग्रेस का दावा है कि करीब चार महीने में 45 बच्चों की मौत हुई है, जबकि प्रशासन ने अब तक 32 मौतों की पुष्टि की है।
एक अक्टूबर को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रभावित गांव जगला का दौरा किया था। इस दौरान कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि कुछ बच्चों की मौत प्रशासनिक आंकड़ों में दर्ज नहीं की गई। हालांकि, मौतों की कुल संख्या और रिकॉर्ड में कथित अंतर को लेकर दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
57 गांवों में 50 हजार लोगों की स्क्रीनिंग का दावा
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्र के 57 गांवों में 49,553 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। बच्चों की मौतों का मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भी लंबित है। अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों को अपना जवाब देना होगा।
