जबलपुर। एक छोटी-सी बात पर समाज से बहिष्कृत किए गए एक व्यक्ति को बीमार पत्नी की मौत के बाद शव श्मशान तक ले जाने के लिए चार कंधे भी नसीब नहीं हुए। जैसे-तैसे शव श्मशान तक ले गया तो लोगों ने संदिग्ध मौत की कहानी गढ़कर पुलिस बुला ली और दाह संस्कार भी नहीं होने दिया। देर शाम तक पत्नी का शव पाने के लिए वो जिला मुख्यालय में डॉक्टरों और पुलिस से गुहार लगाता रहा, लेकिन किसी ने उसकी एक नहीं सुनी। कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
मानवता को झकझोरने वाला यह मामला शहडोल जिले के ग्राम पंचायत गोरतरा का है। यहां के निवासी रामसिंह केवट की पत्नी सोनियाबाई (38) की गुरुवार की शाम मौत हो गई। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण वह इलाज भी नहीं करा पाया था। रातभर इंतजार के बाद जब कोई मदद को नहीं आया तो ससुराल से मदद मांगी। वहां से ससुराल का एक व्यक्ति आया, जबकि एक भाई भी आया। तीनों लोग जैसे-तैसे शव को लेकर श्मशान ले जाने लगे तो पुलिस आ गई। रामसिंह ने बताया कि पत्नी की मौत बीमारी से हुई, लेकिन किसी ने संदिग्ध बताकर पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा बनाकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेजा। देर शाम तक पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका था।
इसलिए था बहिष्कृत
रामसिंह ने बताया कि उसने तीन साल पहले बाल-दाढ़ी नहीं बनवाने का संकल्प लिया था। डेढ़ साल पहले उसके पिता प्रेमलाल की मौत हो गई। संकल्प के कारण उसने बाल व दाढ़ी नहीं बनवाए। इस कारण परिवार व समाज ने उसका हुक्का-पानी बंद कर दिया। वह अपनी पत्नी व 15 साल की पुत्री गुड़िया को लेकर गांव से कुछ दूर रहने लगा। बहिष्कार के बाद शासन की योजनाओं का लाभ लेने से भी वंचित हो गया था।

मुकेश शुक्ला, कलेक्टर शहडोल ने बताया कि मामले की जांच के लिए अधिकारियों को गांव भेजा गया है। जिस किसी की भी लापरवाही सामने आएगी, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Bhupendra Singh

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