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शिवराज सिंह चौहान मानहानि केस से मुक्त, वीडी शर्मा व भूपेंद्र सिंह को भी MP-MLA कोर्ट से मिली राहत

Published: Wed, 11 Mar 2026 10:00 PM (IST)

राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा द्वारा मानहानि का मामला वापस लेने के बाद जबलपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ...और पढ़ें

शिवराज सिंह चौहान, वीडी शर्मा व भूपेंद्र सिंह (फाइल फोटो)

शिवराज सिंह चौहान, वीडी शर्मा व भूपेंद्र सिंह (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। एमपी-एमएलए कोर्ट, जबलपुर ने राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा द्वारा दायर मानहानि का मामला वापस लेने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, खजुराहो से भाजपा सांसद वीडी शर्मा और भाजपा विधायक भूपेंद्र सिंह को दोषमुक्त कर दिया है। यह आदेश विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार की अदालत ने पारित किया।

सुनवाई के दौरान परिवादी विवेक तन्खा की ओर से अधिवक्ता सोम मिश्रा और शिवराज सिंह चौहान सहित अन्य पक्षों की ओर से अधिवक्ता श्याम विश्वकर्मा ने पैरवी की। अदालत में बताया गया कि यह परिवाद 4 जनवरी 2022 को दायर किया गया था, जबकि 29 अप्रैल 2023 को परिवादी के बयान दर्ज किए गए थे। इसके बाद 20 जनवरी 2024 को अदालत ने शिवराज सिंह चौहान और अन्य के खिलाफ अपराध दर्ज करने का आदेश दिया था।

हालांकि अंतिम निर्णय से पहले ही विवेक तन्खा की ओर से मानहानि का मामला वापस लेने का आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए तीनों नेताओं को दोषमुक्त कर दिया।

पंचायत चुनाव से जुड़ा था विवाद

यह मामला वर्ष 2021 में हुए मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों के दौरान ओबीसी आरक्षण से जुड़े विवाद से जुड़ा था। उस समय विवेक तन्खा सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में इस मामले में पैरवी कर रहे थे। इसी संदर्भ में दिए गए कुछ बयानों को लेकर शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ उन्होंने मानहानि का आरोप लगाया था।

तन्खा का कहना था कि इन बयानों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और उन्हें सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ा। इसी आधार पर उन्होंने सिविल और आपराधिक मानहानि के मामले दर्ज कराए थे। सिविल मामले में 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई थी, जबकि आपराधिक शिकायत में आईपीसी की धारा 500 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी।

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सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर सुलझा 

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने दोनों पक्षों को सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने की सलाह दी थी। इसके बाद दोनों पक्षों ने लंबी कानूनी लड़ाई के बजाय आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने का फैसला किया।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें एमएम सुंदरेश और एनके सिंह शामिल थे, ने समझौते को रिकॉर्ड पर लेते हुए मानहानि से जुड़े मामलों को निरस्त करने का आदेश दिया था। इसी क्रम में अब जबलपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने भी मामले का निस्तारण कर दिया।

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