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पं. धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम को हाई कोर्ट से राहत, छतरपुर गोलीकांड में मिली जमानत

Published: Wed, 16 Sep 2026 03:21 PM (IST)

पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग को छतरपुर गोलीकांड मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से जमानत मिल ...और पढ़ें

भाई शालिग्राम गर्ग (दायें) के साथ पूजा-अर्चना करते पंडित धीरेंद्र शास्त्री।

भाई शालिग्राम गर्ग (दायें) के साथ पूजा-अर्चना करते पंडित धीरेंद्र शास्त्री।

HighLights

  1. शालिग्राम गर्ग को छतरपुर गोलीकांड मामले में जमानत मिली।

  2. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहाई दी।

  3. शालिग्राम पर एक शख्स पर जानलेवा हमला का आरोप था।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर और कथावाचक पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग उर्फ छोटे सरकार को छतरपुर के चर्चित गोलीकांड मामले में हाई कोर्ट से राहत मिल गई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर स्थित एकलपीठ ने उनकी जमानत याचिका मंजूर करते हुए 50 हजार रुपये के मुचलके पर जेल से रिहा करने के निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। बुधवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए शालिग्राम की जमानत मंजूर कर दी।

मोतीलाल कुशवाहा पर हमले और गोली चलाने का आरोप

मामला छतरपुर जिले के राजनगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, शालिग्राम गर्ग पर अपने साथियों के साथ मिलकर मोतीलाल कुशवाहा पर जानलेवा हमला करने और गोली चलाने का आरोप है। शिकायत के अनुसार, घटनाक्रम के दौरान पिस्तौल से फायरिंग भी की गई थी।

इस मामले में राजनगर थाना पुलिस ने शालिग्राम को 15 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्होंने जमानत के लिए जिला अदालत का रुख किया, लेकिन वहां से उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। इसके बाद हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई।

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बचाव पक्ष ने कहा- पुरानी रंजिश और दबाव में फंसाया

हाई कोर्ट में शालिग्राम की ओर से अधिवक्ता रोहित रघुवंशी और अमित दवे ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि शालिग्राम को पुरानी रंजिश और राजनीतिक दबाव के चलते मामले में फंसाया गया है।

अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि मामले में उन्हें उनकी पारिवारिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से आरोपित बनाया गया है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए 50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहाई का आदेश दिया।