क्या हाथी भी मनाते हैं शोक? करंट से मृत साथी की कब्र पर पहुंचा झुंड... शहडोल में हाथियों का अनोखा व्यवहार चर्चा में
शहडोल में करंट लगने से मरे हाथी की कब्र पर उसके झुंड के हाथी पहुंचे और काफी देर तक रुके ...और पढ़ें

शहडोल के जंगल में दिखाई दे रहा जंगली हाथियों का झुंड। (सौजन्य वन विभाग)
HighLights
शहडोल में करंट से मृत हाथी की कब्र पर झुंड पहुंचा।
हाथियों ने साथी की कब्र पर रुककर शोक व्यक्त किया।
यह घटना हाथियों के गहरे सामाजिक संबंधों को दर्शाती है।
डिजिटल डेस्क, शहडोल। जंगल में रहने वाले हाथियों का अपने साथियों से जुड़ाव कितना गहरा होता है, इसका एक संवेदनशील दृश्य शहडोल जिले में सामने आया है। करंट लगने से मारे गए एक नर हाथी को दफनाए जाने के बाद उसी झुंड के हाथी उसकी कब्र तक पहुंचे और काफी देर तक वहां रुके रहे। इस घटना ने वन्यजीवों के सामाजिक व्यवहार और उनके बीच मौजूद भावनात्मक संबंधों की ओर ध्यान खींचा है।
मामला पश्चिम ब्यौहारी वन परिक्षेत्र के चंदौली गांव का है। यहां बुधवार को खेत में बोरवेल के पास करंट लगने से करीब 15 वर्षीय नर मखना हाथी की मौत हो गई थी। वन विभाग ने नियमानुसार हाथी के शव को दफना दिया था। इसके बाद उसी क्षेत्र में विचरण कर रहे हाथियों के झुंड की गतिविधियों ने वन अमले का ध्यान आकर्षित किया।

साथी की कब्र पर पहुंचा हाथियों का झुंड
जानकारी के अनुसार, ब्यौहारी वन क्षेत्र में करीब 30 हाथियों का झुंड शनिवार को नजर आया। बताया गया कि हाथियों का यह झुंड उस स्थान पर भी लौटा, जहां उसके साथी की मौत हुई थी। झुंड के हाथी कब्र के पास पहुंचे और कुछ समय तक वहां ठहरे रहे। इससे पहले भी मौत वाले दिन झुंड के उसी स्थान पर लौटने की जानकारी सामने आई थी।
हाथियों का बार-बार उस जगह पहुंचना उनके व्यवहार को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इस गतिविधि के पीछे की सटीक वजह वैज्ञानिक अध्ययन से ही स्पष्ट हो सकती है।
हाथियों में होते हैं गहरे सामाजिक संबंध
उत्तर वन मंडलाधिकारी तरुणा वर्मा के अनुसार, हाथी सामाजिक प्रवृत्ति के वन्यजीव हैं। वे झुंड में रहते हैं और उनके बीच लंबे समय तक बने रहने वाले सामाजिक संबंध होते हैं। किसी साथी की मौत के बाद उसके शव या उससे जुड़ी जगह के आसपास हाथियों का ठहरना शोक जैसे व्यवहार का संकेत माना जाता है।
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उन्होंने बताया कि हाथियों की स्मरण क्षमता और सामाजिक व्यवहार उनकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं। पूर्व अनुभवों और झुंड के सदस्यों से जुड़ी स्मृतियां उनके व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं।
वन्यजीवों के व्यवहार को समझने का अवसर
शहडोल की यह घटना एक बार फिर बताती है कि हाथियों का जीवन केवल भोजन और आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका सामाजिक ढांचा भी काफी जटिल होता है। साथी की मौत के बाद कब्र के आसपास झुंड की मौजूदगी इसी व्यवहार को समझने का अवसर देती है।
