रीवा में 9 सिर वाले दशानन पर छिड़ा विवाद: कारीगर ने भूल सुधार कर 10वां सिर जोड़ा, तब 24 घंटे बाद हुआ रावण दहन
रीवा के सेमरिया में दशहरे पर रावण के पुतले में 9 सिर होने पर विवाद हो गया, जिससे रावण दहन ...और पढ़ें

रीवा में कारीगर की चूक से बना 9 सिर वाला दशाननन का पुतला।
HighLights
सेमरिया में रावण के पुतले में 9 सिर होने पर विवाद।
पुलिस हस्तक्षेप के बाद कारीगरों ने दसवां सिर जोड़ा।
24 घंटे की देरी से हुआ रावण दहन समारोह संपन्न।
डिजिटल डेस्क, रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सेमरिया में इस बार दशहरे पर रावण दहन से पहले ऐसा विवाद खड़ा हो गया कि आयोजन एक दिन के लिए टालना पड़ा। वजह थी रावण के पुतले में 10 की जगह सिर्फ 9 सिर होना। पुतले की इस चूक को लेकर लोगों ने आपत्ति जताई और विरोध शुरू कर दिया। मामला बढ़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। आखिरकार कारीगरों ने रातों-रात रावण का दसवां सिर तैयार कर पुतले में लगाया, जिसके बाद अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में रावण दहन किया गया।
कारीगर की चूक से बिगड़ा दशहरे का कार्यक्रम
सेमरिया में दशहरा उत्सव समिति हर साल रावण का विशाल पुतला तैयार कर उसका दहन करती है। इस बार पुतला बनाते समय कारीगर से गलती हो गई और रावण के परंपरागत 10 सिरों की जगह 9 सिर ही बनाए गए।
जैसे ही लोगों का ध्यान इस ओर गया, पुतले को लेकर विवाद शुरू हो गया। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक मान्यताओं से जोड़ते हुए नौ सिर वाले रावण के दहन को अशुभ बताया और आपत्ति जताई। विरोध बढ़ने के कारण निर्धारित समय पर रावण दहन नहीं हो सका और आयोजन स्थल पर तनाव की स्थिति बन गई।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, रातों-रात जोड़ा दसवां सिर
विवाद की सूचना मिलने पर सेमरिया पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया और आयोजन समिति को पुतले में दसवां सिर जोड़ने के लिए कहा। इसके बाद कारीगरों ने रात में ही दसवां सिर तैयार कर पुतले में लगा दिया।
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अगले दिन हुआ रावण दहन
पुतले में सुधार के बाद अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में विधि-विधान के साथ रावण दहन किया गया। इस तरह करीब 24 घंटे की देरी से दशहरा उत्सव की प्रमुख रस्म पूरी हो सकी।
विवाद शांत कराने और आयोजन संपन्न कराने में पुलिस की भूमिका की लोगों ने सराहना की। दहन स्थल पर लोगों ने 'सेमरिया पुलिस जिंदाबाद' के नारे भी लगाए। आखिरकार रावण दहन के साथ उत्सव पूरा हुआ और लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया।
