विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पन्ना की धरती से निकला 27.29 कैरेट का नायाब हीरा, कीमत करीब 2 करोड़; नदी किनारे भी जुटी हजारों की भीड़

Published: Thu, 17 Sep 2026 09:02 PM (IST)

मध्य प्रदेश के पन्ना में एनएमडीसी की खदान से 27.29 कैरेट का बेशकीमती हीरा मिला है, जिसकी अनुमानित कीमत दो ...और पढ़ें

खदान से निकला बेशकीमती हीरा। (सौजन्य एनएमडीसी)

खदान से निकला बेशकीमती हीरा। (सौजन्य एनएमडीसी)

HighLights

  1. पन्ना में 27.29 कैरेट का जेम क्वालिटी हीरा मिला।

  2. हीरों की नीलामी में वैश्विक परिस्थितियों के कारण देरी।

  3. बारिश के बाद नदी किनारे हजारों लोग हीरे तलाशने पहुंचे।

डिजिटल डेस्क, पन्ना। मध्य प्रदेश की रत्नगर्भा धरती पन्ना ने एक बार फिर बेशकीमती खजाना उगला है। मझगवां स्थित नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएमडीसी) की हीरा खनन परियोजना में मंगलवार को 27.29 कैरेट का जेम क्वालिटी हीरा मिला है। इसकी अनुमानित कीमत करीब दो करोड़ रुपये बताई जा रही है।

मार्च 2024 में दोबारा खनन शुरू होने के बाद यह एनएमडीसी की परियोजना से मिला अब तक का सबसे बड़ा जेम क्वालिटी का हीरा है। इससे पहले जुलाई 2026 में इसी खदान से 13.16 कैरेट का जेम क्वालिटी हीरा मिला था। वर्ष 2024 से अब तक परियोजना से करीब 14 हजार कैरेट हीरे निकाले जा चुके हैं।

एशिया की इकलौती यंत्रीकृत हीरा खदान

मझगवां की एनएमडीसी परियोजना को एशिया महाद्वीप की इकलौती यंत्रीकृत हीरा खदान बताया जाता है। यहां प्राकृतिक हीरों का व्यवस्थित और संगठित तरीके से उत्पादन किया जाता है। पन्ना में संगठित हीरा उत्पादन की शुरुआत 1967 में हुई थी, जबकि सुव्यवस्थित उत्पादन 1971-72 से शुरू हुआ।

पन्ना क्षेत्र में हीरा खनन का इतिहास करीब 1675 ईस्वी से जुड़ा माना जाता है। जिले की हीरा-धारित पट्टी की उथली खदानों से भी समय-समय पर बड़े और उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक हीरे मिलते रहे हैं।

डेढ़ साल से नीलामी का इंतजार 

एक ओर खदान से लगातार हीरे निकल रहे हैं, तो दूसरी ओर इनकी नीलामी का इंतजार लंबा होता जा रहा है। पन्ना में आखिरी हीरा नीलामी फरवरी 2024 में हुई थी। इसके बाद से हीरा धारक और कारोबारी अगली नीलामी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हीरा कार्यालय में फिलहाल करीब 80 हीरे रखे होने की जानकारी है।

मार्च 2026 में हीरा कार्यालय और एनएमडीसी की संयुक्त नीलामी छतरपुर में कराने का प्रस्ताव था, लेकिन इसे टाल दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, वैश्विक परिस्थितियों का भी हीरा बाजार पर असर पड़ा है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट को भी नीलामी में देरी के कारणों में बताया जा रहा है।

अक्टूबर में नीलामी कराने की तैयारी

हीरा कार्यालय के हीरा पारखी अनुपम सिंह के मुताबिक, अक्टूबर में नीलामी कराने का प्रयास किया जा रहा है। पन्ना की नीलामी में महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हैदराबाद समेत कई राज्यों के व्यापारी पहुंचते हैं। यहां से खरीदे गए हीरों को तराशने के बाद रूस, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात समेत विभिन्न देशों के बाजारों तक भेजा जाता है।

यह भी पढ़ें- पन्ना में ‘चिता आंदोलन’ के दौरान बुजुर्ग महिला की मौत, पांचवें दिन भी नदी में डटे विस्थापित; बोले- ‘न्याय दो या मार दो’

नदी किनारे हीरे तलाशने उमड़ी हजारों की भीड़

पन्ना में सिर्फ खदानें ही नहीं, बल्कि बारिश के बाद नदी की चाल में भी हीरे तलाशने का सिलसिला शुरू हो जाता है। बुधवार को विश्रामगंज रेंज के रुंझ डैम के डूब क्षेत्र में अचानक हजारों लोगों की भीड़ जुट गई।

छतरपुर, टीकमगढ़ और उत्तर प्रदेश के बांदा सहित आसपास के इलाकों से करीब चार से पांच हजार लोग हीरे की तलाश में पहुंच गए। कई लोगों ने नदी किनारे अस्थायी टेंट तक लगा लिए। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर वहां से वापस भेजा।