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पन्ना में ‘चिता आंदोलन’ के दौरान बुजुर्ग महिला की मौत, पांचवें दिन भी नदी में डटे विस्थापित; बोले- ‘न्याय दो या मार दो’

Published: Wed, 16 Sep 2026 05:42 PM (IST)

पन्ना में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य बांधों से प्रभावित विस्थापितों का 'चिता आंदोलन' पांचवें दिन भी जारी है, जिसमें ...और पढ़ें

पन्ना की नदी में 'चिता आंदोलन' करते ग्रामीण।

पन्ना की नदी में 'चिता आंदोलन' करते ग्रामीण।

HighLights

  1. पन्ना की नदी में 'चिता आंदोलन' पांचवें दिन भी जारी है।

  2. आंदोलन के दौरान एक बुजुर्ग महिला की मौत हुई।

  3. विस्थापित उचित पुनर्वास और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

डिजिटल डेस्क, पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय और रुंझ बांध के साथ सिंगरौली-ललितपुर रेलवे लाइन से प्रभावित विस्थापितों का ‘चिता आंदोलन’ बुधवार को पांचवें दिन भी जारी है। आंदोलन के दौरान टपरिया निवासी एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों में आक्रोश और बढ़ गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक विस्थापित परिवारों को उनका हक और उचित पुनर्वास नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।

नदी में ‘जिंदा चिता’ बनाकर प्रदर्शन

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जय किसान संगठन के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के मुताबिक केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवार नदी में ‘जिंदा चिता’ बनाकर धरना दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने कभी विकास परियोजनाओं का विरोध नहीं किया, बल्कि ग्रामसभा की भूमिका, पारदर्शी प्रक्रिया और उचित पुनर्वास की मांग की है।

आरोप है कि प्रभावित परिवारों की जमीनों पर कार्रवाई के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आंदोलनकारी पानी में बनाई गई चिताओं पर लेटकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

‘घर डूब रहे, सरकार परियोजना का काम आगे बढ़ा रही’

भटनागर ने आरोप लगाया कि आंदोलन को रोकने के लिए पहले धारा 144 और अब धारा 163 के तहत कार्रवाई की गई तथा प्रदर्शनकारियों पर मुकदमे दर्ज किए गए। उनके मुताबिक कई परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, जबकि उनके घर डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। कुछ मकानों के गिरने और पुलिस कार्रवाई के भी आरोप लगाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रभावितों की समस्या केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है। यह जीवन, संविधान और गरिमा से जुड़ा सवाल है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि सिंचित जमीन को रिकॉर्ड में असिंचित बताकर मुआवजा कम किए जाने की स्थिति भी सामने आई है।

5 लाख से 12.50 लाख के पैकेज का मुद्दा

आंदोलनकारियों के अनुसार पहले पुनर्वास पैकेज के तहत 5 लाख रुपये का प्रावधान था। जुलाई में हुए आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री ने कैबिनेट में इसे बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये करने की घोषणा की थी। हालांकि प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कई प्रभावित परिवारों को अभी तक पहले घोषित 5 लाख रुपये की राशि भी पूरी तरह नहीं मिली है।

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‘परियोजनाएं अलग, पीड़ा एक’

आंदोलन में मझगाय, रुंझ, केन-बेतवा लिंक और सिंगरौली-ललितपुर रेलवे लाइन से प्रभावित परिवार एक मंच पर आए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि भले ही परियोजनाएं अलग-अलग हों, लेकिन विस्थापन और पुनर्वास की समस्या समान है।

महिला आंदोलनकारियों दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत ने कहा कि वे बच्चों के साथ धरने पर इसलिए बैठी हैं क्योंकि उनकी समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं है।

न्याय की मांग

अमित भटनागर ने कहा कि आंदोलन का नारा ‘न्याय दो या मार दो’ प्रभावित परिवारों की बेबसी को दर्शाता है। उनका कहना है कि वे मौत नहीं, न्याय की मांग कर रहे हैं और बिजली-पानी जैसी सुविधाएं रोककर उनकी आवाज दबाई नहीं जा सकती।

आंदोलनकारियों ने डूब क्षेत्र के प्रत्येक परिवार का सत्यापन कराने, लंबित मुआवजे का भुगतान करने, मकान और जमीन का उचित मूल्यांकन करने तथा घोषित 12.50 लाख रुपये के पुनर्वास पैकेज को तत्काल लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक ‘चिता आंदोलन’ जारी रहेगा।