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MP के छोटे से गांव से शंघाई तक पहुंचे अजय, विश्व कौशल स्पर्धा में दिखाया हुनर; अब PM मोदी से की मुलाकात

Published: Fri, 09 Oct 2026 06:22 PM (IST)

पन्ना जिले के पुरैना गांव के अजय अहिरवार ने शंघाई में आयोजित विश्व कौशल प्रतियोगिता में ब्रिकलेइंग में भारत का ...और पढ़ें

पीएम मोदी ने वर्ल्ड स्किल्स स्पर्धा में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिभागियों से मुलाकात की, जिनमें पन्ना के अजय अहिरवार भी शामिल रहे।

पीएम मोदी ने वर्ल्ड स्किल्स स्पर्धा में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिभागियों से मुलाकात की, जिनमें पन्ना के अजय अहिरवार भी शामिल रहे।

HighLights

  1. अजय अहिरवार ने विश्व कौशल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

  2. उन्होंने शंघाई में ब्रिकलेइंग स्पर्धा में अपना कौशल दिखाया।

  3. अपनी उपलब्धि के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के पुरैना गांव के रहने वाले अजय अहिरवार के लिए बड़ी उपलब्धि का अवसर आया, जब उन्हें वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले युवाओं के साथ प्रधानमंत्री आवास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने का अवसर मिला। अजय ने चीन के शंघाई में आयोजित विश्व कौशल प्रतियोगिता में ब्रिकलेइंग यानी ईंटों की चिनाई के क्षेत्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनका सफर इस बात की मिसाल है कि तकनीकी शिक्षा, निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन के जरिए छोटे गांवों के युवा भी अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकते हैं।

पुरैना से शंघाई तक का सफर

अजय अहिरवार का जन्म 10 नवंबर 2005 को हुआ। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के पुरैना गांव से आने वाले अजय ने तकनीकी शिक्षा के माध्यम से अपने कौशल को निखारा। उन्होंने ITI में मेसन ट्रेड की पढ़ाई की, जिसमें निर्माण कार्य, ईंटों की चिनाई और संबंधित तकनीकी प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण शामिल है।

अजय की वर्ल्डस्किल्स यात्रा में कानपुर स्थित YPSVEF के प्रशिक्षण वातावरण की अहम भूमिका रही। यहां उन्होंने अपने हुनर को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के स्तर तक पहुंचाने के लिए अनुशासित अभ्यास किया। उनके प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य तकनीक में सटीकता, काम में निरंतरता और समय के दबाव में भी बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता विकसित करना था।

क्या है ब्रिकलेइंग 

ब्रिकलेइंग केवल ईंटें जोड़ने का काम नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी ड्रॉइंग के अनुसार सटीक माप, सही संरेखण और आकर्षक संरचना तैयार करना जरूरी होता है। प्रतियोगियों को निर्धारित समय के भीतर गुणवत्ता और डिजाइन के मानकों का पालन करते हुए ईंटों तथा ब्लॉकों से संरचनाएं बनानी होती हैं।

इस दौरान माप में छोटी-सी गलती भी अंतिम परिणाम को प्रभावित कर सकती है। इसलिए इस क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान के साथ एकाग्रता, गति और लगातार समान गुणवत्ता बनाए रखने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है।

मेंटर के मार्गदर्शन में निखारा हुनर

अजय ने विशेषज्ञ और मेंटर मनोज कुलश्रेष्ठ के मार्गदर्शन में अपनी तैयारी की। इस प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने अपने तकनीकी कौशल को बेहतर बनाने और प्रतियोगिता की परिस्थितियों के अनुरूप काम करने पर ध्यान दिया।


शंघाई में भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक मानकों को समझने और दुनिया के अन्य कुशल प्रतिभागियों के साथ अपनी क्षमता परखने का अवसर रहा। इस अनुभव से उन्हें भविष्य में अपने कौशल को और विकसित करने के लिए नई सीख मिली।

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युवाओं के लिए प्रेरणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात अजय सहित प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले युवाओं के लिए विशेष अवसर रहा। अजय की यात्रा तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के महत्व को सामने लाती है। उनका सफर बताता है कि हुनर, मेहनत और सही प्रशिक्षण के सहारे युवा अपने लिए नए अवसर बना सकते हैं और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।