MP के बाघ अभयारण्यों में अब ‘नो फोन’ सफारी, 1 अक्टूबर से लागू होंगे सख्त नियम
मध्य प्रदेश के बाघ अभयारण्यों में 1 अक्टूबर से शुरू हो रहे नए पर्यटन सत्र में जंगल सफारी के दौरान ...और पढ़ें

जंगल सफारी। (प्रतीकात्मक चित्र)
HighLights
नए पर्यटन सत्र में मोबाइल पर पूरी तरह रोक।
फोन स्विच ऑफ कर लॉक बॉक्स में रखना होगा।
नियम तोड़ने पर पर्यटक, ड्राइवर, गाइड पर कार्रवाई।
संजय कुमार शर्मा, उमरिया। मध्य प्रदेश के बाघ अभयारण्यों (टाइगर रिजर्व) में नए पर्यटन सत्र के साथ सफारी के नियम और सख्त होने जा रहे हैं। 1 अक्टूबर से शुरू हो रहे नए पर्यटन सत्र में जंगल सफारी के दौरान पर्यटक मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। पर्यटक फोन अपने साथ जिप्सी में ले जा सकेंगे, लेकिन पार्क में प्रवेश से पहले उसे स्विच ऑफ कर विशेष लॉक वाले बाक्स में रखना होगा। बाक्स की चाबी जिप्सी चालक के पास रहेगी और सफारी पूरी होने के बाद ही मोबाइल वापस दिया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत जंगल के भीतर पर्यटक मोबाइल से फोटो या वीडियो नहीं बना सकेंगे। पार्क प्रबंधन का उद्देश्य सफारी के दौरान पर्यटकों की गतिविधियों को नियंत्रित करने के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक व्यवहार को बनाए रखना है।
पर्यटक के साथ ड्राइवर और गाइड पर भी होगी कार्रवाई
मोबाइल प्रतिबंध के नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी सिर्फ पर्यटकों तक सीमित नहीं रहेगी। यदि सफारी के दौरान किसी पर्यटक के हाथ में मोबाइल फोन पाया जाता है, तो संबंधित पर्यटक के साथ जिप्सी चालक और गाइड के खिलाफ भी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इससे पार्क प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि सफारी के दौरान मोबाइल इस्तेमाल को लेकर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट दे चुका आदेश
टाइगर रिजर्वों में मोबाइल ले जाने पर पिछले वर्ष ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रतिबंध लगाया गया था। हालांकि, पार्क प्रबंधन के मुताबिक इसके पालन में अपेक्षित सख्ती नहीं हो सकी। अब नए पर्यटन सत्र में नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी है।
मोबाइल को लॉक बाक्स में रखने की व्यवस्था से सफारी के दौरान फोन के इस्तेमाल की संभावना को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। 1 अक्टूबर से प्रदेश के टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए खुलेंगे और इसी के साथ मोबाइल प्रतिबंध के नए सख्त नियम लागू किए जाएंगे।
पार्क के अंदर मोबाइल का उपयोग सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से बंद कराया गया है। इसे सख्ती से लागू करने के लिए कहा गया है।
- डा. समिता राजौरा, पीसीसीएफ, वन्यजीव, मध्य प्रदेश
