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‘पति-पत्नी की तरह रहते थे...’ फरार निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया की FIR पर हाई कोर्ट में सुनवाई, फैसला सुरक्षित

Published: Wed, 16 Sep 2026 09:08 PM (IST)

निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में दर्ज मामले में एफआईआर रद्द कराने के लिए मध्य प्रदेश ...और पढ़ें

निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया। (फाइल फोटो)

निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जिला कोर्ट में नेहा ने क्षितिज को पहचानने से किया था इन्कार।

  2. हाई कोर्ट में अभियोजन ने कहा- पति-पत्नी की तरह रहते थे।

  3. हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में दर्ज मामले में फरार चल रहीं कटनी की निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने एफआईआर निरस्त कराने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बुधवार को न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

सुनवाई के दौरान अभियोजन ने सह-आरोपित क्षितिज राज बारापात्रे के साथ नेहा पच्चीसिया के संबंधों को लेकर जांच में सामने आए तथ्यों का हवाला दिया। सरकारी पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच में दोनों के एक ही मकान में पति-पत्नी की तरह रहने की बात सामने आई है।

अभियोजन ने कुछ पुलिसकर्मियों के बयानों का भी उल्लेख किया। इनके मुताबिक, क्षितिज को नेहा का पति बताया गया था। वहीं, नेहा के अधीन पदस्थ एक आरक्षक द्वारा घर का राशन और अन्य सामान लाए जाने तथा उसका भुगतान क्षितिज द्वारा किए जाने की जानकारी भी अदालत के समक्ष रखी गई।

अग्रिम जमानत की सुनवाई में एक-दूसरे को पहचानने से किया था इन्कार

मामले में एक अहम तथ्य यह भी सामने आया कि जिला अदालत में अग्रिम जमानत अर्जियों पर सुनवाई के दौरान नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज बारापात्रे ने एक-दूसरे को पहचानने से इन्कार किया था। अभियोजन ने इसी बिंदु को जांच के दौरान सामने आए अन्य तथ्यों के साथ अदालत के समक्ष रखा।

हालांकि, इन तथ्यों पर हाई कोर्ट का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है।

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एक करोड़ की जमीन 15-20 लाख में खरीदने का आरोप

यह मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में जमीन के एक सौदे से जुड़ा है। पुलिस ने नेहा पच्चीसिया समेत तीन आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।

अभियोजन के अनुसार, हत्या के एक मामले में जमानत मिलने के बाद करीब एक करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को कथित तौर पर 15 से 20 लाख रुपये में खरीदा गया। इसी से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

वहीं, नेहा पच्चीसिया की ओर से दलील दी गई कि एफआईआर में उनकी भूमिका स्पष्ट नहीं है और उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे ने पक्ष रखा।