कमल नाथ सरकार में मंत्री के रिश्तेदार को फायदा पहुंचाने बदला नहर का नक्शा, लागत दोगुने से ज्यादा हुई; हाई कोर्ट में 4 नवंबर को अंतिम सुनवाई
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सिवनी की पाटन-कनेरा सिंचाई परियोजना का नक्शा बदलने और लागत दोगुनी होने के गंभीर आरोप ...और पढ़ें

HighLights
पाटन-कनेरा सिंचाई परियोजना का नक्शा बदलने का आरोप सामने आया।
तत्कालीन मंत्री के रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने के लिए बदलाव किया गया।
परियोजना की लागत 9.30 करोड़ से बढ़कर लगभग 20 करोड़ हुई।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सिवनी जिले की पाटन-कनेरा लघु सिंचाई परियोजना से जुड़े मामले में गंभीर आरोप सामने आए हैं। याचिकाकर्ता किसान ऋषि पाराशर के अधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान दावा किया कि तत्कालीन कमल नाथ सरकार में सिंचाई मंत्री रहे हुकुम सिंह कराड़ा के रिश्तेदार गणपत सिंह गुर्जर को लाभ पहुंचाने के लिए परियोजना का मूल नक्शा बदल दिया गया। याचिकाकर्ता के मुताबिक नक्शे में बदलाव के बाद परियोजना की स्वीकृत लागत 9.30 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 20 करोड़ रुपये हो गई।
मामले की अगली और अंतिम सुनवाई 4 नवंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ के समक्ष होगी।
2019 में दायर हुई थी याचिका
यह मामला वर्ष 2019 में हाई कोर्ट पहुंचा था। पाटन निवासी किसान ऋषि पाराशर ने परियोजना के नक्शे में बदलाव और उससे किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर याचिका दायर की थी। शुरुआत में मामले की सुनवाई एकलपीठ में हुई।
19 नवंबर 2024 को न्यायमूर्ति विनय सराफ की एकलपीठ ने मामले को व्यापक जनहित से जुड़ा मानते हुए इसे युगलपीठ के समक्ष रखने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रकरण डिवीजन बेंच में पहुंचा।
मूल नक्शे में बदलाव से बढ़ी परियोजना की लागत
याचिकाकर्ता का आरोप है कि पाटन-कनेरा क्षेत्र में कृषि उपयोग के लिए लघु सिंचाई परियोजना की शुरुआती स्वीकृत लागत 9.30 करोड़ रुपये थी। बाद में परियोजना का नक्शा और स्वरूप बदल दिया गया, जिसके चलते लागत करीब 20 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दावा किया गया कि तत्कालीन सिंचाई मंत्री के सचिव की ओर से मुख्य अभियंता को पत्र भेजे जाने के बाद परियोजना में बदलाव कराया गया।
किसानों की जमीन प्रभावित होने का दावा
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बदले हुए प्रोजेक्ट से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों की उपजाऊ जमीन प्रभावित हो रही है। याचिकाकर्ता ने परियोजना के मूल और संशोधित नक्शे, लागत में हुई वृद्धि तथा प्रभावित किसानों से जुड़े तथ्यों को अदालत के समक्ष रखने की मांग की है।
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4 नवंबर को तय होगा मामले का रुख
अब हाई कोर्ट की युगलपीठ परियोजना के मूल स्वीकृत नक्शे, उसमें किए गए बदलाव, लागत बढ़ने के कारण और किसानों की जमीन पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई करेगी। अदालत में लगाए गए आरोपों की अंतिम न्यायिक पड़ताल आगामी सुनवाई में होगी।
