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CJP के प्रदर्शन में दिल्ली जा रहे युवाओं को इटारसी में हिरासत में लेने का मामला गरमाया; हाई कोर्ट का MP सरकार को नोटिस

Published: Fri, 09 Oct 2026 10:21 PM (IST)

दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जा रहे महाराष्ट्र के छात्रों को इटारसी में हिरासत में लेने के मामले में मध्य ...और पढ़ें

मप्र हाई कोर्ट भवन।

मप्र हाई कोर्ट भवन।

HighLights

  1. महाराष्ट्र के छात्रों को इटारसी रेलवे स्टेशन पर हिरासत में लिया गया।

  2. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।

  3. कोर्ट ने छात्रों को पेश करने या सुरक्षित वापसी का निर्देश दिया।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे महाराष्ट्र के छात्र-छात्राओं को मध्य प्रदेश के इटारसी रेलवे स्टेशन पर हिरासत में लिए जाने का मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने संबंधित लोगों को न्यायालय के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।

कोर्ट ने छात्रों को पेश करने के दिए निर्देश

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने विशाखा प्रशांत लोंढे बनाम मध्य प्रदेश शासन सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई की। पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि हिरासत में लिए गए संबंधित व्यक्तियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि शासन चाहे तो संबंधित छात्र-छात्राओं की उनके परिवारों तक सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की व्यवस्था कर सकता है। मामले में अब 13 अक्टूबर को आगे सुनवाई होगी।

दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे छात्र

मिली जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के छात्र-छात्राएं पुणे से गोवा एक्सप्रेस में सवार होकर दिल्ली जा रहे थे। उन्हें 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होना था। प्रदर्शन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का विरोध किया जाना था।

इसी दौरान ट्रेन के इटारसी रेलवे स्टेशन पहुंचने पर छात्र-छात्राओं को उतारकर हिरासत में ले लिया गया। पुलिस अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 21 बताई गई है।

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बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर सुनवाई

हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दायर की गई हैं। ऐसी याचिका के जरिए अदालत से किसी व्यक्ति को हिरासत में रखे जाने की वैधता की जांच करने और जरूरत पड़ने पर उसे पेश करने का अनुरोध किया जाता है।

हाई कोर्ट के नोटिस और पेशी के निर्देश के बाद अब मामले में राज्य सरकार का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। अगली सुनवाई में हिरासत से जुड़े तथ्यों और संबंधित व्यक्तियों की स्थिति पर आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सकती है।