अमरकंटक व डिंडौरी में साल बोरर कीट से उजड़े जंगल को फिर हरा-भरा करेगा वन विभाग, अप्रैल से शुरू होगी उपचार योजना
वन विभाग ने डिंडौरी और अमरकंटक में साल बोरर कीट से प्रभावित जंगलों को फिर से हरा-भरा करने की व्यापक ...और पढ़ें

अमरकंटक से लगे हुए तरवर टोला में कीट से प्रभावित पेड़ो की चल रही कटाई।इस तरह के होते हैं साल बोरर कीट। (सौजन्य- वन विभाग)
HighLights
साल बोरर प्रभावित पेड़ों की कटाई और नए पौधे रोपण।
छोटे पौधों की सुरक्षा और वृद्धि पर विशेष ध्यान।
अप्रैल 2027 से योजना का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन।
आशीष शुक्ला, डिंडौरी। साल बोरर कीट के हमले से उजड़े जंगलों की भरपाई के लिए वन विभाग ने व्यापक उपचार योजना तैयार की है। प्रभावित पेड़ों की कटाई के साथ ही वन संपदा को फिर से हरा-भरा करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए विभाग ने कटाई से पहले ही पर्यावरणीय क्षति की भरपाई की विस्तृत योजना शासन को भेजी थी, जिसके बाद ही केंद्र सरकार से पेड़ काटने की अनुमति मिली है। इस योजना पर अप्रैल 2027 से जमीनी स्तर पर काम शुरू होगा।
वन विभाग की योजना के अनुसार, जितने पेड़ साल बोरर के कारण काटे जाएंगे, उतनी ही संख्या में नए पौधे रोपे भी जाएंगे। इतना ही नहीं, जंगल में पहले से मौजूद छोटे और असुरक्षित पौधों को चिह्नित कर उनकी सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे। इन पौधों के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था, खाद-पानी और नियमित देखरेख कर उनकी वृद्धि दर बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, ताकि जंगल जल्द से जल्द अपने पुराने स्वरूप में लौट सके।
प्रभावित पेड़ों का कटना जरूरी
एसडीओ-फरेस्ट सुरेंद्र जाटव का कहना है कि साल बोरर से प्रभावित पेड़ों को काटना ही इस कीट को रोकने का सबसे कारगर उपाय है। प्रभावित पेड़ को काटने से कीट एक पेड़ से दूसरे स्वस्थ पेड़ तक नहीं फैल पाता, जिससे पूरे जंगल को बचाया जा सकता है। अभियान में अब तक ग्रामीणों के सहयोग से इस वर्ष लगभग 40 लाख साल बोरर कीटों को पकड़कर उनका दहन किया जा चुका है।
डेढ़ लाख से अधिक पेड़ों की होगी कटाई
गौरतलब है कि डिंडौरी जिले में 1 लाख 46 हजार 874 साल के पेड़ साल बोरर कीट से प्रभावित पाए गए हैं, जबकि पड़ोसी अनूपपुर जिले के अमरकंटक क्षेत्र में 10 हजार पेड़ इस कीट की चपेट में हैं। इन सभी प्रभावित पेड़ों को उपचार योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से काटा जा रहा है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
जिले में कुल वन क्षेत्र की तुलना में एक प्रतिशत से भी कम क्षेत्र के पेड़ काटे जा रहे हैं, इसलिए पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई आसानी से हो सकेगी। जितना भी रकबा प्रभावित होगा, उसकी भरपाई उपचार योजना के तहत होगी।
-अशोक सोलंकी, डीएफओ, डिंडौरी
