विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मैहर की हिनौती माइंस में भर रहा बिहरागंज का पानी, धान के खेतों पर मंडरा रहा खतरा; किसानों की चिंता बढ़ी

Published: Sun, 04 Oct 2026 04:22 PM (IST)

मैहर की हिनौती माइंस में बिहरागंज माइंस से लगातार पानी डाले जाने से जलस्तर बढ़ गया है, जिससे आसपास के ...और पढ़ें

हिनौती माइंस ओवरफ्लो। (वीडियो ग्रैब)

हिनौती माइंस ओवरफ्लो। (वीडियो ग्रैब)

HighLights

  1. बिहरागंज माइंस का पानी हिनौती माइंस में लगातार भरा जा रहा।

  2. माइंस की मेड़ से पानी रिसकर धान के खेतों में पहुँच रहा।

  3. किसानों ने फसल बचाने हेतु प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

डिजिटल डेस्क, मैहर। मैहर जिले के रामनगर क्षेत्र की ग्राम पंचायत हिनौती में माइंस में लगातार पानी भरने से आसपास के किसानों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिहरागंज माइंस का पानी लगातार गुप्ता परिवार की जमीन पर बनी हिनौती माइंस में डाला जा रहा है। पानी का स्तर बढ़ने से माइंस ओवरफ्लो की स्थिति में पहुंचती नजर आ रही है।

माइंस की मेड़ से पानी रिसकर नीचे खेतों तक पहुंच रहा है। इन खेतों में इस समय धान की फसल खड़ी है। किसानों को डर है कि यदि पानी का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा और माइंस की मेड़ टूट गई तो बड़ी मात्रा में पानी खेतों में पहुंच सकता है। इससे तैयार हो रही धान की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है।

मेड़ से रिस रहा पानी 

मौके से सामने आए वीडियो में माइंस के नीचे खेतों में खड़ी धान की फसल और मेड़ से रिसता पानी दिखाई दे रहा है। किसानों का कहना है कि खेतों में लगातार पानी पहुंचने के कारण फसल की देखभाल प्रभावित हो रही है। पानी भरने की वजह से समय पर खाद तक नहीं डाली जा पा रही है।

ग्रामीणों के मुताबिक, फिलहाल पानी रिसने से फसल प्रभावित हो रही है, लेकिन सबसे बड़ी चिंता माइंस की मेड़ को लेकर है। उनका कहना है कि यदि मेड़ कमजोर होकर टूटती है तो अचानक बड़ी मात्रा में पानी खेतों में पहुंच सकता है।

‘मेड़ टूटी तो खेतों में भर जाएगा पानी’

किसानों का दावा है कि बिहरागंज माइंस से लगातार पानी हिनौती माइंस में पहुंचाया जा रहा है। यदि पानी की निकासी या भराव को नियंत्रित नहीं किया गया तो माइंस की क्षमता से अधिक जलभराव की स्थिति बन सकती है। ऐसे में मेड़ टूटने पर नीचे स्थित खेतों में तेज बहाव के साथ पानी पहुंचने का खतरा है।

ग्रामीणों का कहना है कि इससे केवल धान की फसल ही नहीं, बल्कि खेतों की मिट्टी और कृषि भूमि को भी नुकसान हो सकता है। किसानों ने मामले को लेकर अल्ट्राटेक कंपनी के अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने का दावा किया है।

डीएस माइंस के शिशिर ताम्रकार से भी फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। ऐसे में मामले पर कंपनी का पक्ष सामने नहीं आ सका।

प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

माइंस में बढ़ते जलभराव को लेकर चिंतित किसानों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों का कहना है कि बिहरागंज माइंस से हिनौती माइंस में पानी डाले जाने की प्रक्रिया की जांच की जाए। साथ ही माइंस की मेड़ की मजबूती और जलभराव की स्थिति का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए।

यह भी पढ़ें- जबलपुर में बीमा राशि के लिए गर्भवती पत्नी की हत्या, पिकअप से कुचलकर दिया हादसे का रूप; प्रेम विवाह का खौफनाक अंत

ग्रामीणों की मांग है कि किसी संभावित नुकसान का इंतजार करने के बजाय समय रहते जरूरी सुरक्षा इंतजाम किए जाएं, ताकि मेड़ टूटने या धान की फसल बर्बाद होने जैसी स्थिति को टाला जा सके।