कान्हा में 7 माह में 11 बाघों की मौत, 9 मामलों में CDV का शक; जलस्रोतों से संक्रमण फैलने की आशंका ने बढ़ाई चिंता
कान्हा टाइगर रिजर्व में अप्रैल से अक्टूबर के बीच 11 बाघों की मौत हुई है, जिनमें से 9 में कैनाइन ...और पढ़ें

कान्हा अभयारण्य के जलस्रोत में मौजूद बाघ। (सौजन्य- वन विभाग)
HighLights
कान्हा में अप्रैल से अक्टूबर के मध्य 11 बाघों की हुई मौत।
जलस्रोतों से संक्रमण फैलने की आशंका ने चिंता बढ़ाई।
बाघिन अमाही व उसके चार शावकों की भी हुई थी मौत।
डिजिटल डेस्क, उमरिया। कान्हा टाइगर रिजर्व में अप्रैल से अक्टूबर के बीच 11 बाघों की मौत हुई है। इनमें से नौ मौतों को कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रबंधन ने आठ बाघों में संक्रमण की पुष्टि की है। मौतों में संक्रमण की भूमिका सामने आने के बाद इसका प्रसार रोकना प्रबंधन के लिए चुनौती बन गया है। यहां के जलाशयों और पोखरों के पानी से संक्रमण फैलने की आशंका ने चिंता बढ़ाई है।
संक्रमण के शुरुआती दौर में अप्रैल में एक शावक का शव जलाशय के पास मिला था। कुछ दूरी पर दूसरे शावक का शव भी बरामद हुआ था। इससे जलस्रोतों के जरिए संक्रमण फैलने की संभावना पर चर्चा शुरू हुई। हालांकि, जलाशय के पास शव मिलने से पानी के माध्यम से संक्रमण फैलने की पुष्टि नहीं होती। फिर भी, वन्यजीवों द्वारा जलस्रोतों के साझा उपयोग के कारण इस पहलू की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कैसे फैलता है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस?
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार सीडीवी मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों के निकट संपर्क और श्वसन स्राव से फैलता है। संक्रमित जानवरों के स्राव या अन्य जैविक पदार्थों से दूषित वातावरण भी जोखिम बढ़ा सकता है। मुकुंदपुर के वन्यप्राणी चिकित्सक नितिन गुप्ता ने कहा कि संक्रमित कुत्ते या अन्य वन्यजीवों के जलस्रोत इस्तेमाल करने के बाद वहां दूसरे वन्यजीवों के पहुंचने से संक्रमण फैलने की आशंका रहती है।
अप्रैल में एक के बाद एक मौतों से बढ़ी थी चिंता
संक्रमण का असर बाघिन अमाही के परिवार में तेजी से दिखा। 21 से 29 अप्रैल के बीच महज आठ दिनों में अमाही और उसके चार शावकों की मौत हो गई। 21, 23, 25 और 29 अप्रैल को हुई इन मौतों ने वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ाई।
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अक्टूबर में भी मौतों का सिलसिला
अक्टूबर में भी मौतों का सिलसिला जारी रहा। 18 अक्टूबर को अरौली गांव से रेस्क्यू कर उपचार के लिए लाई गई मादा बाघ शावक की मौत हो गई। उसमें सीडीवी संक्रमण की पुष्टि हुई थी। लगातार हो रही मौतों के बीच संक्रमित बाघों की पहचान, प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी, जलस्रोतों के आसपास वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर और संक्रमण के संभावित स्रोतों की जांच अहम हो गई है।
